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Thursday, 15 November 2018

कानपुर देहात - दारा सिंह के भतीजे ने दंगल में लड़ी सबसे बड़ी कुश्ती, फिर खोला एक हजार कुश्ती का राज

रिपोर्ट - अरविन्द शर्मा 

आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में दंगल एक अहम स्थान रखता है। समय समय पर होने वाले दंगल कुश्ती लोगों के लिए अब अनूठे आयोजन मने जाते हैं। क्योंकि आधुनिकता के दौर में लोग दंगल से अलगाव बनाते जा रहे हैं लेकिन कानपुर देहात के सारी में होने वाला दंगल आज भी विशेष स्थान रखता है। 




यहां उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, राजस्थान, दिल्ली जैसे प्रांतों से विख्यात पहलवान दंगल में अपना जौहर दिखा रहे हैं, वहीं नेपाल देश से आये पहलवान थापा ने भी दांव पेंच दिखाए। इस दंगल में बुंदेलखंड के विख्यात पहलवान दारा सिंह के भतीजे शैतान सिंह जब पहुंचे तो लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। शैतान सिंह ने पहलवानी के अपने इस सफर के बारे में पत्रिका संवाददाता से कुछ जरूरी बातें साझा की।

1000 कुश्ती का खोला राज

 
 
 
 
उन्होंने बताया कि आज के युग मे नौजवान मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि आधुनिक यंत्रों में मशगूल रहते है। खेलों में वे क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन पर ध्यान देते है। जबकि दंगल कुश्ती का एक विशेष स्थान है। प्राचीनकाल से चला आ रहा दंगल आज भी लोगों को आकर्षित करता है। इसमें कला का प्रदर्शन करने से स्वास्थ्य हष्ट पुष्ट रहता है। साथ ही व्यक्ति शरीर का सही ढंग से खयाल रख सकता है। करीब 37 वर्षीय शैतान सिंह ने बताया कि 16 साल के पहलवानी सफर में उन्होंने करीब 1000 कुश्ती लड़ी होगी। इसमें 700 कुश्ती उन्होंने जीती हैं, 200 हारे एवं 100 कुश्ती बराबर पर छूटी हैं।

दिए ये जरूरी टिप्स

उन्होंने बताया कि एक अच्छा पहलवान बनने के लिए सबसे सबसे पहले ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी है। जैसे एक ब्रह्यचारी काम, मोह, भोग वासना से दूर रहता है, उसी प्रकार कुश्ती के लिए इन सब बातों का पालन जरूरी है। साथ ही दिन के 24 घंटे में 6 घंटे खुद के लिए निकलना आवश्यक है। इसमें दंड बैठक, दौड़, लंबी कूद आदि एक्सरसाइज करना बहुत आवश्यक है। खाने पीने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। खाने में हाईजीनिक खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त फलाहार व दूध का सेवन करना चाहिए। अगर हो सके तो दूध अंडे का सेवन भी करें। इससे ऊर्जा दुगुनी मात्रा में शरीर मे रहती है। क्योंकि कुश्ती के समय विपक्षी को हराने के लिए जमीन पकड़ में शरीर मे ऊर्जा का होना बहुत जरूरी है। जिससे मौका लगते है दुगुनी ताकत से उसे चित किया जा सके।

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