ब्यूरो बनारस -कैलाश सिंह विकास
चौबेपुर के तोफापुर गांव के शहीद सीआरपीएफ जवान रमेश यादव का एक डेढ़ साल का बेटा आयुष भी है। आयुष का बचपन से ही एक पैर टेढ़ा है, जिसे सही करवाने का वादा करके पिता रमेश यादव वापस ड्यूटी पर गए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंज़ूर था।
पुलवामा में हुए आतंकवादी आत्मघाती हमले में रमेश शहीद हो गए। अब आयुष का पैर कैसे ठीक होगा इसकी भी चिंता परिजनों को सताने लगी हैं।
परिजनों ने बताया कि शहीद रमेश के पुत्र आयुष का एक पैर जन्म से ही टेढ़ा है, जिसे सीधा करवाने की बात इसबार छुट्टी पर आने के समय रमेश ने कही थी और आयुष को डाक्टर को भी दिखाया था। डाक्टर ने कहा था कि अभी आयुष बच्चा है इसलिये अभी समय है और जूता पहनाकर ही ये समस्या दूर हो जाएगी।
वापस जाते समय रमेश बोलकर गए थे कि अगली बार आउंगा तो इसका इलाज अच्छे से करवाऊंगा और इसके लिए जूता भी लाऊंगा पर अब परिजन और उनके गाँव वाले उनके तिरंगे में लिपटे शव का इंतज़ार कर रहे हैं।
आयुष बिलख रही मां के पास जा रहा है तो रोने लग रहा है इसलिए परिजन उसे गाँव में घुमा रहे हैं। घर से दूर हमारी मुलाकात आयुष से हुई तो उसने अपनी तोतली ज़बान में सिर्फ पापा कहा और शांत हो गया।
चौबेपुर के तोफापुर गांव के शहीद सीआरपीएफ जवान रमेश यादव का एक डेढ़ साल का बेटा आयुष भी है। आयुष का बचपन से ही एक पैर टेढ़ा है, जिसे सही करवाने का वादा करके पिता रमेश यादव वापस ड्यूटी पर गए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंज़ूर था।
पुलवामा में हुए आतंकवादी आत्मघाती हमले में रमेश शहीद हो गए। अब आयुष का पैर कैसे ठीक होगा इसकी भी चिंता परिजनों को सताने लगी हैं।
परिजनों ने बताया कि शहीद रमेश के पुत्र आयुष का एक पैर जन्म से ही टेढ़ा है, जिसे सीधा करवाने की बात इसबार छुट्टी पर आने के समय रमेश ने कही थी और आयुष को डाक्टर को भी दिखाया था। डाक्टर ने कहा था कि अभी आयुष बच्चा है इसलिये अभी समय है और जूता पहनाकर ही ये समस्या दूर हो जाएगी।
वापस जाते समय रमेश बोलकर गए थे कि अगली बार आउंगा तो इसका इलाज अच्छे से करवाऊंगा और इसके लिए जूता भी लाऊंगा पर अब परिजन और उनके गाँव वाले उनके तिरंगे में लिपटे शव का इंतज़ार कर रहे हैं।
आयुष बिलख रही मां के पास जा रहा है तो रोने लग रहा है इसलिए परिजन उसे गाँव में घुमा रहे हैं। घर से दूर हमारी मुलाकात आयुष से हुई तो उसने अपनी तोतली ज़बान में सिर्फ पापा कहा और शांत हो गया।

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