महेन्द्र मिश्रा ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मन की बात कार्यक्रम का अंतिम
भाग था। प्रदेश भर में सभी जिला केन्द्रों पर भारी संख्या में लोगों ने
मन की बात कार्यक्रम को सुना। लखनऊ में प्रदेश सरकार के मंत्री आशुतोष
टण्डन तथा प्रदेश उपाध्यक्ष जेपीएस राठौर ने कार्यकर्ताओं के साथ मदन मोहन
मालवीय विद्यालय गोमतीनगर में सुना। प्रदेश कार्यालय में मुख्यालय प्रभारी
भारत दीक्षित, सह प्रभारी चैधरी लक्ष्मण सिंह, अतुल अवस्थी, प्रदेश
उपाध्यक्ष जसवंत सैनी, प्रदेश मंत्री वाई.पी. सिंह, अनूप गुप्ता, प्रदेश
प्रवक्ता मनीष शुक्ला, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी आलोक अवस्थी, हिमांशु
दुबे, कमल ज्योति से अरूणकांत त्रिपाठी, राजकुमार आदि उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री जी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में पुलवामा के शहीदों का
उल्लेख किया। उन्होंने कहा 10 दिन पूर्व भारत माता ने अपने वीर सपूतों को
खो दिया। आज मन भरा हुआ है, इन पराक्रमी वीरों ने हम सवा सौ करोड़ भारतीयों
की रक्षा में खुद को खपा दिया। पुलवामा के आतंकी हमले में वीर जवानो के
शहादत के बाद देश भर में लोगों के मन में आघात और आक्रोश है। शहीदों और
उनके परिवारो के प्रति चारो तरफ संवेदनाएं उमड़ रही है। इस आतंकी हिंसा के
विरोध में, जो आवेग आपके और मेरे मन में, वही भाव, हर देशवासी के अंतर मन
में है।
उन्होंने वीर सैनिकों के शहादत के बाद उनके परिजनों की जो प्रेरणादायी
बाते सामने आयी है उसने पूरे देश के हौसले को और बल दिया है। देश भक्ति
क्या होती है, त्याग-तपस्या क्या होती है, मैं युवा पीढ़ी से अनुरोध करूंगा
कि वो शहीदों के परिवारों ने जो जज्बा दिखाया है उसको जाने और समझने का
प्रयास करके प्रेरणा ले। प्रधानमंत्री जी राष्ट्रीय वार मेमोरियल की चर्चा
की जहां राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर जवानों
की शौर्य गाथाओं को संजो कर रखा जा सकेगा। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के
प्रेरणादायी व्यक्तित्व की चर्चा की, नौजवानों को मार्गदर्शन के लिए
प्रेरित किया।उन्होंने जमशेदजी टाटा, स्वामी विवेका नंद, मोरारजी देसाई की चर्चा की।
प्रधानमंत्री जी ने आयुष्मान भारत योजना की चर्चा करते हुए कहा कि अधिकतम
लाभ पिछले पांच महीनों में लगभग 12 लाख गरीब परिवारों ने इस योजना का लाभ
उठा चुके है। उन्होंने कहा कि मैंने पाया है कि गरीब के जीवन में इससे
कितना बड़ा परिवर्तन आ रहा है। अंत में उन्होंने कहा अगले दो महीने हम सभी
चुनाव के गहमागहमी में व्यस्त रहेंगे। मैं स्वयं भी इस चुनाव में एक
प्रत्याशी रहूंगा। स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा का सम्मान करते हुए अगली मन
की बात मई महीने के आखरी रविवार को होगी
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