जिला संवादाता अरविन्द शर्मा
जहां एक ओर केन्द्र की मोदी सरकार और प्रदेश की
योगी सरकार सरकारी योजनाओं को भ्रष्टाचार से मुक्त रखने और भ्रष्टाचारियों
के खिलाफ कड़ी कार्यवाही किये जाने का और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने का दावा
कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही हैं। न
तो सरकारी योजनाएं भ्रष्टाचार से बच पा रही हैं और न ही भ्रष्टाचारियों पर
कार्यवाही हो पा रही हैं। जिसके चलते विकास की आस लगाये ग्रामीणों को केवल
सरकारी योजनाओं में भ्रश्टाचार ही मिल रहा हैं। सरकारी योजनाओं में खुलेआम
हो रहे भ्रष्टाचार पर जिम्मेदार जांच कराकर कार्यवाही करने की बात कह रहे
हैं। लेकिन जांच कब तक होगी और कब ऐसे भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही होगी ये
किसी को नहीं मालूम। नतीजतन सरकारी योजनाओं के माध्यम से गांव के विकास की
आस लगाये लोगो को केवल कोरा आश्वासन ही मिल रहा हैं। ऐसा ही एक मामला यूपी
के जनपद कानपुर देहात में देखने को मिला। जहां ग्राम प्रधान और पंचायत
सचिव ने मिलकर सरकार योजनाओं का ऐसा बंदरबांट किया कि विकास के आस लगाये
बैठे ग्रामीणों को केवल भ्रष्टाचार ही हाथ लगा। जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने
जिले के आलाधिकारियों से की। जिसके बाद अधिकारियों ने जांच टीम को मौके पर
जांच कराया। लेकिन कार्यवाही कब तक होगी यह देखने वाली बात होगी।
मामला हैं कानपुर देहात के झींझक विकास खण्ड क्षेत्र में मंगलपुर ग्राम
पंचायत का। जहां की ग्राम प्रधान दीपिका देवी और पंचायत सचिव ने पंचायत के
विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की। जिसके बाद शासन ने ग्राम पंचायत बनीपारा
के विकास के लिए धनराशि भी आंवटित हो गई। जिसके चलते ग्रामीणों को ग्राम
पंचायत की तस्वीर बदलने की उम्मीद जगी। लेकिन ग्राम प्रधान दीपिका देवी ने
पंचायत सचिव के साथ मिलकर ग्राम पंचायत का विकास कराने के नाम पर सरकारी
धनराशि का ऐसा बंदरबांट किया कि ग्रामीणों के होस उड़ गये। न तो पंचायत
क्षेत्र में विकास कार्य कराये और न ही अन्य कार्य। यहीं नहीं ग्राम प्रधान
और सचिव ने मिलकर एक कार्य का दो बार भुगतान कराकर धनराशि का आपस में
बंदरबांट कर लिया। वहीं ग्राम पंचायत को रोशन करने के लिए शासन ने एलईडी
स्ट्रीट लाइटे लगाने की योजना को भी भ्रष्टाचार की भेट चढ़ा दिया। सस्ती
एलईडी लाइटे लगवाकर प्रधान और सचिव ने महंगे बिलों पर भुगतान करा लिया।
यहीं नहीं एलईडी लाइटों को कुछ दिनों पर विद्युत पोलों से खुलवाकर बेच
दिया।
ग्राम प्रधान ने
पेयजल समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों को राहत दिलाने के नाम पर पुराने सरकारी
हैण्डपम्पों को रिबोर और सही कराने के नाम पर केवल सरकारी धनराशि का
बंदरबांट किया। न ही सरकारी हैण्डपम्पों को सही कराया गया और न ही कोई
सरकारी हैण्डपम्प रिबोर हुआ। जिसके चलते लोगो को पेयजल की समस्या से जूझना
पड़ रहा हैं। गांव में एक निजि हैण्डपम्प के सहारे लोग अपनी पेयजल की जरूरत
पूरी कर रहे हैं। जिसके चलते उस निजि हैण्डपम्प में लोगो को सुबह हो साम हर
वख्त भीड़ लगी रहती हैं। यहीं नहीं गांव में पानी टंकी होने के बावजूद भी
लोगो को पानी की समस्याओं से जूझना पड़ रहा हैं। ग्राम प्रधान दीपिका देवी ने सरकारी आवास दिलाने के नाम पर भी जमकर धांधली
करते हुए आपात्रों को सरकारी आवास दिये। और प्रात्र को इस योजना के लाभ से
वंचित कर दिया। यहीं नहीं पीएम मोदी के स्वच्छ भारत के सपने पर पानी फेरते
हुए गांव में शौचालय बनवाने के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई। न तो गांव
में शौचालय बनवाये और न ही स्वच्छता पर बल दिया। केवल आवांटित धनराशि का
केवल बंदरबांट ही किया। इतना ही नहीं ग्राम प्रधान ने गांव के मुख्य चैराहे
और सरकारी स्कूल के पास बने सामुदायिक शौचालय को बनवाने के नाम पर केवल
पैसे का बदंरबांट किया। जिसके चलते केवल शौचालय प्रयोग के बिना ही जर्जर हो
गया। वहीं ग्राम पंचायत के प्रमुख तालाबों की देखरेख न होने के चलते इन
तालाबों का दबंगों का कब्जा हो गया हैं और शेष जगह गंदगी में तब्दील हो गई
हैं।
वहीं ग्राम प्रधान दीपिका देवी ने पंचायत सचिव के साथ मिलकर सरकारी योजना
का लाभ गलत तरीके से अपने परिवार को दिला दिया। ग्राम प्रधान ने अपने पति
जो कि पेसे से कारोबारी हैं। उनको मनरेगा का मजदूर बताकर सरकारी पैसों का
बदंरबांट किया। यहीं नहीं ग्राम प्रधान ने अपनी सास को आपात्र होने के
बावजूद भी सरकारी पेशन का लाभ दिलवा रही हैं। इतना ही नहीं सरकारी सिस्टम
के साथ सांठगांठ करते हुए ग्राम प्रधान ने गरीबों के आनाज पर डका डालते हुए
आपात्र अपने परिवार को सरकारी आनाज का लाभ दिलवा दिया। वहीं पात्र गरीबों
को इसका लाभ नहीं मिल पाया। वहीं गांव में बने अन्त्येश्टि स्थल के मरम्मत के नाम पर भी जमकर धांधली
की गई। न तो उसका मरम्मतीकरण हुआ और न ही उसकी तस्वीर बदली। शौचालय में न
तो दरवाजे और न ही सीट। न तो वहां पीने के व्यवस्था हैं और नही सफाई की।
इतना ही नहीं अन्त्येश्टि स्थल का मेन दरवाजा ही गायब हो गया।जिसका खुलासा होने के बाद ग्रामीणों ने जिले के आलाधिकारियों से मामले की
शिकायत की। जिसके बाद मुख्य विकास अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए
जांच टीम गठित कर दी और मौके पर जाकर शीघ्र जांच रिर्पोट उपलब्ध कराने की
निर्देश दिये।
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