कृपा शंकर चौधरी ब्यूरो गोरखपुर
अफसरों की गलती का खामियाजा भुगत रहा है गरीब परिवार
कर्ज चुकाने के लिए पूरे कोरोना काल में करता रहा मजदूरी
गोरखपुर। खोराबार के रामपुर रा. ग्रामसभा के राम अधीन के परिवार के साथ समय और अधिकारी दोनों की मार पड़ी है और आलम यह है कि दिनों - दिन परिवार कर्ज के दलदल में समाता जा रहा है। इस परिवार ने सरकार के प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ क्या लिया परिवार पर मुसीबत टूट पड़ी । एक तरफ परिवार का मुखिया लापता हो गया तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री आवास योजना के संबंधित अधिकारियों के गलती से आवंटित धनराशि दूसरे के खाते में जमा करा दिया गया। मजदूरी करने वाले एकलौते पुत्र को घर बनवाओ पैसा मिल जाएगा का आश्वासन दिया गया किंतु कर्ज से तैयार इस आवास का पैसा नहीं मिला जबकि कागज़ में आवास पूर्ण की मुहर लग चुकी है।
मामला दरअसल यह है कि खोराबार के रामपुर रा. के निवासी राम अधीन के नाम 2018 में आवास आवंटित हुआ किन्तु इसी दौरान राम अधीन के लापता होने और मृत्यु हो जाने के कारण आवास की धनराशि उनकी पत्नी इशरावती के खाते में भेजने की प्रक्रिया की गई किन्तु संबंधित अधिकारी के त्रुटि के कारण वह धनराशि अन्य के खाते में चला गया। तत्कालीन सेक्रेटरी किरन के द्वारा उक्त खाताधारक के खाते में आया प्रथम किस्त 40000 रूपए किसी तरह ट्रांसफर करा पीड़ित का आवास बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई किन्तु कागजों में काम न दुरूस्त होने से शेष दोनों किस्त पुनः उसी खाते में जमा हो गये जिसे खाताधारक द्वारा यह मेरा है कहकर नहीं दिया गया।
गौरतलब है कि कागजी प्रक्रिया नहीं दुरुस्त की गई और मजदूरी करने वाले पीड़ित के एकलौते पुत्र लहर लाल को कार्य पूरा करने पर पैसा मिलने की बात कही गई जिसके कारण लहर लाल द्वारा कर्ज लेकर आवास बनवाया गया किन्तु लगभग एक वर्ष से ऊपर समय से पैरवी करने के बाद भी पैसे नहीं मिले जबकि कागज़ में सरकार को आवास पूर्ण होने की मुहर लगा दी गई है।
बताते चलें इस संबंध में तत्कालीन सेक्रेटरी किरन से पूछने पर उन्होंने उपर से गलती होना बताया और इसपर उनके द्वारा किए गए कार्य पर उन्होंने उक्त खाते को होल्ड करवाने की बात कही। जबकि वर्तमान सेक्रेटरी विवेक सिंह ने कार्रवाई कराने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। पीड़ित के पुत्र लहर लाल ने बताया कि इस संबंध में प्रधान मीरा देवी से लेकर ब्लाक के अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है। हृदय स्पर्श करने वाली यह बात है कि इन जिम्मेदारों के लापरवाही के चलते जिस कोरोनावायरस काल में प्रवासी मजदूर घरों की तरफ भाग रहे थे कर्ज से मुक्ति पाने के लिए लहर लाल बाहर ही टिका रहा।
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