चीफ रिपोटर UP - चन्द्र मोहन तिवारी
आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रायबरेली में रेल कोच फैक्ट्री
के विस्तार परियोजना का शुभारम्भ करते हुए उसे राजनीतिक मंच का अखाड़ा बना
दिया। आश्चर्य की बात है कि प्रधानमंत्री ने इसका भी संज्ञान नहीं लिया
कि इस सरकारी कार्यक्रम में प्रदेश के राज्यपाल और उ0प्र0 विधानसभा के अध्यक्ष उपस्थित हैं। उन्होने इन दोनों महान विभूतियों को विषम
स्थिति में डाल दिया।
उन्होने इसका भी संज्ञान नहीं लिया कि सभी राजनीतिक दल एवं प्रदेश की जनता राज्यपाल महोदय को निर्विवाद रूप में देखती है और उनसे न्याय की अपेक्षा करती है। साथ ही अध्यक्ष विधानसभा सभी राजनीतिक दल के विधायक उनसे निष्पक्ष निर्णय की अपेक्षा रखते हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री जी द्वारा कांग्रेस पार्टी के नेताओं की आलोचना करके जो राजनीतिक मंच बनाया गया उसकी जितनी भी निन्दा की जाय, कम है।
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता ओंकारनाथ सिंह ने आज जारी बयान में कहा कि अच्छा होता भाजपा इस कार्यक्रम के बाद अपना कार्यक्रम करती और उसमें प्रधानमंत्री जो चाहते वह बोलते। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री सहित अपने सभी नेताओं की जो भी रैली करते हैं उसको सरकारी रूप इसीलिए देते हैं ताकि सरकार के पैसे का सदुपयोग अपनी पार्टी के हित के लिए कर सकें।
सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री उ0प्र0 की धरती पर सम्बोधन कर रहे थे पर
बुलंदशहर में हुए दंगे के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा। राफेल के बारे में
स्पष्टीकरण देने के बजाय जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया। प्रदेश की
कानून व्यवस्था पर एक शब्द भी नहीं बोले। प्रधानमंत्री ने गोस्वामी
तुलसीदास जी की चैपाई का उदाहरण देते हुए जो कहा है झूठहि लेना झूठहि देना,
झूठहि भोजन झूठ चबेना यह उन्हीं पर सीधे-सीधे चरितार्थ होता है क्योंकि
जनता से उन्होने 2 करोड़ प्रतिवर्ष नौकरी देने का वादा किया, 15 लाख खाते
में देने का वादा किया, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का वादा
किया, नोटबन्दी के फायदे का असर पचास दिन में दिखाने का वादा किया और
जीएसटी से व्यापार व्यवस्था में सुधार का वादा किया, जिसमें कोई भी वादा
सफल नहीं हो पाया और जनता को निराश होना पड़ा और उसी का परिणाम है कि अभी
सम्पन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार के रूप में
सामने आया।

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