राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश प्रवक्ता सुरेन्द्रनाथ त्रिवेदी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र सरकार द्वारा तीन तलाक बिल लााने की क्या आवष्यकता थी? जब सर्वोच्च न्यायालय ने ही तीन तलाक (तलाक ए बिददत) को अवैध घोषित कर दिया था।
केन्द्र सरकार को यदि सर्वोच्च न्यायालय के विरोध में ही कार्य करना है तो देश का संविधान अवष्य खतरे में पड जायेगा क्योंकि सरकार जहां अपना स्वार्थ साधने की चेष्टा करती है वहां सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की आवष्यकता नहीं समझती।
सुरेन्द्रनाथ त्रिवेदी ने कहा कि महिला सशक्तीकरण और महिला सुरक्षा तथा हिन्दुत्व का नारा देने वाले लोग अब मुस्लिम महिलाओं के हिमायती बनने की कोशिश कर रहे हैं जबकि हिन्दू महिलाओं के प्रत्येक जनपद में लाखों मुकदमें पारिवारिक न्यायालयों में लम्बित है और वह महिलाएं धीरे धीरे अपना पूरा जीवन मुकदमों की पैरवी में बिता देती हैं। ऐसी स्थिति में केन्द्र सरकार द्वारा इन न्यायालयों को दिन प्रतिदिन सुनवाई करने का यदि आदेश ही पारित कर देती तो पीडित महिलाओं को कुछ राहत मिल सकती थी परन्तु इस सरकार ने हिन्दू महिलाओं और मुस्लिम में ही फर्क करने की कोशिश की साथ ही साथ अपने बिल में मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा और भरण पोषण का कोई जिक्र नहीं किया। केवल पुरूष वर्ग को तीन साल की सजा दिलाकर अपनी पीठ ठोक रही है। जब मुस्लिम महिलाओं की तलाक अवैध हो गयी और उसका शौहर जेल चला गया तो बच्चों को कौन पालेगा और भरण पोषण का खर्च कौन देगा?
रालोद प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर भाजपा द्वारा चली गयी यह चाल भी कामयाब नहीं होगी क्योंकि अपने सम्पूर्ण कार्यकाल में महिला उत्पीडन पर कोई भी प्रभावी कदम सरकार द्वारा नहीं उठाया गया। बनारस हिन्दू विशवविद्यालय की छात्राओं तथा आंगनबाडी कार्यकत्रियों को पुलिस की लाठी से पिटवाकर इस सरकार ने अपनी महिला सुरक्षा और सषक्तीकरण की मिशाल पेश की है। आगामी लोकसभा चुनाव में प्रदेश और देश की जनता भारतीय जनता पार्टी को उसकी कारगुजारियों पर सबक सिखाने की तैयारी कर चुकी है जिसकी बानगी उ0प्र0 के सम्पन्न हुये उपचुनावों तथा विगत पांच राज्यों के आम चुनावों में मिल चुकी है।

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