योगी सरकार ने नये वर्ष पर छुट्टा जानवरों से परेशान किसानों को राहत
देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए प्रदेश के सभी ग्रामीण और शहरी
स्थानीय निकायों में 'अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना और संचालन नीति
लागू की जा रही है।
मंगलवार को कैबिनेट ने इस नीति को मंजूरी दे दी। इसके
तहत ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका और
नगर निगमों में अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल खोले जाएंगे। इस मद में व्यय के
लिए सरकार विभिन्न निधियों से धन जुटाएगी और उपकर भी वसूल करेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में संपन्न कैबिनेट
की बैठक में पांच प्रस्तावों को मंजूरी मिली। राज्य सरकार के प्रवक्ता व
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा तथा पशुधन विकास मंत्री एसपी सिंह बघेल ने
पत्रकारों को बताया कि बैलों के जरिये खेती की परंपरा समाप्त होने की वजह
से किसान बछड़ों को छुट्टा छोड़ देते हैं।
ऐसे पशु फसलों को क्षति पहुंचाते
हैं। सड़कों पर इनकी मौजूदगी से मार्ग दुर्घटनाएं भी बढ़ी हैं। इस समस्या
के समाधान के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि गोवंश का
संरक्षण होगा लेकिन, हमे गोकशी स्वीकार नहीं है। आश्रय स्थलों में सरंक्षित
गोवंश को पशुपालन विभाग की सेवाएं उपलब्ध कराये जाने के साथ ही गोवंश से
उत्पादित दूध, गोबर, कम्पोस्ट आदि की बिक्री से आश्रय स्थलों को आर्थिक रूप
से स्वावलंबी बनाया जाएगा।
अभी तक सरकार द्वारा प्रतिदिन पंजीकृत गोशालाओं
में 30 रुपये प्रति गाय के हिसाब से अनुदान दिये जा रहे थे लेकिन, ये उपाय
पूरे नहीं थे। गोवंश आश्रय स्थल के लिए एनजीओ और ट्रस्ट को भी सरकार
सहूलियत देगी।

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