विश्वपति वर्मा
मेक इन इंडिया बनाने की बात चली तो देश के इंजीनियरों और योग्य बेरोजगारों को भी पंख लग गए गांव, गली ,शहर ,मोहल्ले में इस बात की चर्चा होने लगी कि अब चाइना ,जापान और कोरिया से वस्तुओं की आयात नही बल्कि विश्व के आधे देशों में भारत से मेक इन इंडिया के सामानों का निर्यात होगा। जिससे देश मे बेरोजगारी की संख्या भी कम होगी
उधर चीन ने अपनी छवि खराब होने से बचाने के लिए खमोशी से 2025 तक दुनिया भर के बाजारों में अपने अच्छे सामानों को पंहुचाने के लिए कमर कस ली है।
जूता, चप्पल, खिलौना मोबाइल, चार्जर, कपड़ा मछली, तेल इत्यादि को कम दाम में उपलब्ध कराने का महारत चीन को हासिल है इसके अलावा चलती इलेक्ट्रिक कार को रिचार्ज कर देने वाले स्मार्ट रोड्स से लेकर रोबोट्स और सैटेलाइट तक चीन अपना जलवा दिखा चुका है
400 घण्टे की स्पीड से चलने वाली बुलेट ट्रेन को चीन पहले ही चला चुका है अब देशी विमान को भी चाइना के बाजारों में उतार दिया ,इन्ही सब सफलताओं के बाद चीन एक बार फिर दुनिया भर के बाजार में राज करने के लिए उतर रहा है।
इधर भारत मे सरकारों द्वारा पहले योजनाओं को बनाया जाता है ,फिर टीवी और अखबार में विज्ञापन के माध्यम से जनता को बताया जाता है उसके बाद बजट बनाकर हजारों करोड़ की धनराशि का बंदरबांट कर लिया जाता है ।उसके बाद योजना ठंडे बस्ते में चली जाती है।
अकेले नरेंद्र मोदी अपने 4 साल के कार्यकाल के दौरान 103 योजनाओं का शुभारंभ कर चुके हैं जिसमे एक" मेक इन इंडिया" भी है,लेकिन इससे शर्मनाक बात और क्या होगी कि जंहा पूर्ववर्ती सरकारों में सोलर लाइट में लगने वाली बैटरी मेड इन इंडिया हुआ करता था अब उसमें चाइना द्वारा निर्मित बैटरी लगाई जा रही है।
अब आप खुद विचार करें कि भारत में मेक इन इंडिया के सपने को कैसे पूरा किया जाएगा।जंहा सोलर की बैटरी तो एक उदाहरण हैं।

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