ग्राउंड रिपोर्ट ,
विश्वपति वर्मा _
आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिन्दी आलोचक, निबन्धकार, साहित्येतिहासकार, कोशकार, अनुवादक, कथाकार और कवि थे ,जो मूल रूप से बस्ती जनपद के बहादुरपुर विकासखंड के अगोना नामक गांव के निवासी थे।
जब देश दुनिया में आचार्य जी का नाम प्रख्यात है तब बस्ती में उनके राजनीतिक पार्टियों द्वारा उनके नाम पर पुस्तकालय एवं शोध संस्थान खोल कर काफी वाहवाही लूटी गई।
आचार्य जी के नाम पर उनके गांव अगोना में खोले गए पुस्तकालय एवं शोध संस्थान की वर्तमान स्थिति क्या है यह जानने के लिए टीम तहकीकात उनके गांव अगोना में पंहुची।
जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर स्थिति इस गांव में टीम तहकीकात के पंहुचने पर पता चला कि आचार्य जी के नाम पर बनाया गया पुस्तकालय एवं शोध संस्थान केवल मजाक बन कर रह गया है।
भवन का शिलान्यास अक्टूबर 2001 में की गई थी जिसमे लगभग आठ लाख रुपया खर्च कर उसका निर्माण कार्य पूरा कराया गया जो अक्टूबर 2004 में बनकर तैयार हुआ। उसके बाद पुस्तकालय का उद्घाटन तत्कालीन जिलाधिकारी रमेंद्र त्रिपाठी ने संपन्न कर भवन पाठकों को समर्पित कर दिया।
लेकिन 15 वर्ष बीत जाने के बाद पाठकों के लिए शुक्ल जी के नाम पर किताबों को जानने समझने एवं साहित्यिक विद्या को समझने के लिए किसी भी प्रकार की कोई सुबिधा उपलब्ध नहीं कराई गई। भवन हाथी दांत की तरहं बना कर खड़ा कर दिया गया है और बड़े अक्षरों में लिख दिया गया पुस्तकालय एवं वाचनालय लेकिन शायद आज तक यंहा कोई एक भी पुस्तक न तो रखी गई और न ही पढ़ने वाले लोग कभी दिखाई दिए।
भवन के बाहर शुक्ल जी की एक मूर्ति भी लगाई गई है जिसके इर्द -गिर्द गंदगियों का अंबार जमा हुआ है ,बगल में लगाए गए एक हैण्डपम्प से शुक्ल जी के मूर्ति के पास पानी का जमावड़ा भी रहता है वंही मूर्ति के ऊपर छाजन की व्यवस्था न करने से जंहा मूर्ति खराब हो रही है वंही जिस स्लैब पर मूर्ति की स्थपना की गई है उसकी भी हाल बदहाल हो रही है।
देख -रेख के अभाव में अब भवन की स्थिति भी खराब हो रही है अंदर की दृश्य देखने के बाद भी ऐसा लग रहा है जैसे वर्षों से किसी प्रकार की कोई साफ सफाई नाम की व्यवस्था तक नहीं हुई है।
बता दें कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जन्म 4 अक्टूबर 1884 को बस्ती जिले के अगोना गांव में हुआ थी ,आचार्य जी आधुनिक काल में यात्रावृत्त ,संस्मरण व निबंध के क्षेत्र में काफी प्रख्यात हुए 2 फ़रवरी 1941 में आचार्य जी का निधन हो गया।


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