विश्वपति वर्मा
आने वाली पीढ़ी हमको माफ नहीं करेगी। हम गरीबी, बेरोजगारी ,अशिक्षा को देख करके चुप बैठे हुए हैं आखिर कब तक हमारी सरकारें हमारे देश की जनता के लिए मूलभूत सुविधाओं के लिए गंभीर नहीं होगी।
यह वें बच्चे हैं जिनके हाथों में किताब होना चाहिए, जिनके हाथों में कांपी होना चाहिए ,जिनके हाथों में कलम होना चाहिए।
लेकिन न तो इनके पास सर्व शिक्षा अभियान की कोई योजना है न ही इनके जीवन स्तर में बदलाव लाने के लिए सरकारी महकमे में कोई व्यवस्था है ।
प्रधानमंत्री सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरूआत 11 अक्टूबर 2014 में हुई थी, इस योजना में सांसदों को ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई थी ।
सांसदों को जिम्मेदारी दी गई थी कि उनके द्वारा तीन गाँवों में भौतिक, सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का विकास वर्ष 2019 तक हो जाना चाहिए। वर्ष 2024 तक उन्हें आठ गाँवों को विकसित करना करने का लक्ष्य था ।जबकि सांसदों को पहले गाँव का विकास वर्ष 2016 तक पूरा करना था ।
लेकिन 2016 बीत जाने के बाद पंचवर्षीय योजनाओं का कार्यकाल भी खत्म होने को है परंतु आजतक एक भी गांव सामाजिक, आर्थिक, भौतिक, सुबिधाओं का ढांचा तैयार नही कर पाए हैं ।
आखिर देश की जनता को कब तक और गुमराह करके रखा जाएगा ,आखिर कोई तो होगा जिम्मेदार ?कोई तो जवाबदेही तय करे?कब तक खमोशी रहेगी ?कब तक झूठ की सरकारों को धक्का मारेंगे।कौन करेगा हमे माफ।सवाल भी है कि आजादी के 71 वर्षों बाद गरीबी उन्मूलन को लेकर सरकार कर क्या रही है।

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