मीडिया डेस्क
करीब छह साल बाद पुनर्गठन होने के बाद राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण की बैठक राजधानी लखनऊ में बृहस्पतिवार को थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद बैठक में मौजूद थे और अफसरों को निर्देश दे रहे थे। आपदा पर हो रही बैठक में कई मंत्रियों समेत प्रमुख सचिव गृह भी मौजूद थे, लेकिन राहत आयुक्त संजय कुमार नहीं पहुंचे। राहत आयुक्त की गैरहाजिरी पर मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई और उन्हें तत्काल हटाने का निर्देश दे दिया। बैठक में जगली जानवरों के हमले को दैवी आपदा मानने का फैसला हुआ।
राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण की शासी निकाय की बैठक में नागरिकों पर जंगली जानवरों के हमले को दैवी आपदा मानने का फैसला हुआ है। हमले में घायल होने या मौत होने पर पीड़ित परिवारीजनों को मुआवजा भी देने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जंगली जानवरों के हमलों से होने वाली जनहानि पर राज्य आपदा मोचक निधि से मुआवजा देने के निर्देश दिए। ऐसी घटनाओं में मृत्यु पर पांच लाख रुपये और घायल होने पर नुकसान के हिसाब से तय मानक पर मुआवजा देने का फैसला किया गया है।
वर्तमान में ऐसी घटनाओं पर वन विभाग मुआवजा देता है, लेकिन बजट की कमी से समय से राहत पहुंचाने में मुश्किल आती है। इसे देखते हुए अब मुआवजा राज्य आपदा मोचक निधि से देने का फैसला हुआ है। गौरतलब है कि प्राधिकरण का हाल ही पुनर्गठन हुआ है। यह बैठक करीब छह साल बाद हुई। प्रमुख सचिव राजस्व सुरेश चंद्रा ने बैठक में प्राधिकरण की पिछली बैठक के निर्णय व उसके क्रियान्वयन व आगे की कार्ययोजना पेश की।
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