लखनऊ- महेंद्र मिश्रा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर सांसद ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बनारस के बारे में घोषित की गयी विभिन्न योजनाओं को जुमला करार दिया है क्योंकि अब आनन-फानन में घोषित की गयी किसी भी परियोजना का कोई भी परिणाम चुनाव पूर्व नहीं मिल सकता है और पूर्व में की गयीं उनकी तमाम घोषणाओं की तरह यह भी एक इवेन्ट ही बनकर रह जायेगा।
प्रधानमंत्री ने वाराणसी को आदर्श शहर बनाने की घोषणा अपने प्रत्याशी बनने के साथ ही किया था, किन्तु दुःखद है कि जेा काशी का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक, अध्यात्मिक स्वरूप था वह भी नष्ट हो गया। वहां के प्राचीन ऐतिहासिक मंदिरों और इमारतों को जिस प्रकार तोड़ा गया उसने काशी के मूल स्वरूप को क्षति पहुचायी है। परिणाम स्वरूप महीनों से साधु, सन्त और साभ्रान्त जन धरना-प्रदर्शन के माध्यम से विरोध करते हुए सड़कों पर उतर रहे हैं। पतित पावनी माँ गंगा का स्वरूप भी स्वच्छ होने के बावजूद केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार अब जल स्नान योग्य भी नहीं बचा है जबकि प्रधानमंत्री ने माँ गंगा ने बुलाया है जैसे भावनात्मक नारे देकर एवं एक मंत्रालय का अतिरिक्त गठन कर नमामि गंगे परियोजना के नाम पर हजारों करोड़ रूपये की धनराशि को भ्रष्टाचार की बलि चढ़ा दी है।
प्रधानमंत्री के अन्य नारों जैसे युवाओं को प्रतिवर्ष दो करोड़ रोजगार, किसानों की आय दुगुनी, 15 लाख रूपये खाते में जमा करने, मंहगाई को कम करने आदि की भांति काशी को क्योटो बनाने का नारा भी जुमला साबित हुआ है। प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का फर्क नजर आने लगा है।
प्रदेश
अध्यक्ष ने कहा कि यही कारण है कि चुनाव नजदीक आते देखकर प्रधानमंत्री
दो दिन से लगातार हवाहवाई घोषणाएं करके देश एवं प्रदेश की भोलीभाली जनता की
भावनाओं से एक बार फिर खेलने का प्रयास कर रहे हैं। आठ-आठ प्रधानमंत्री
देने वाला उत्तर प्रदेश जिसकी काशी बौद्धिक और आध्यात्मिक राजधानी मानी
जाती रही है अब जुमलों में फंसने वाली नहीं है।

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