ग्राउंड रिपोर्ट-विश्वपति वर्मा
सरकार
द्वारा समय- समय पर कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की शुरुआत की जाती है जिससे
शहरी या ग्रामीण क्षेत्रों का विकास एवं वँहा पर निवास करने वाले लोगों के
जीवन मे बदलाव आए लेकिन ऐसा देखा गया है कि सरकार की अधिकांश योजना धरातल
पर आने से पहले ही ध्वस्त हो जाती है जिससे योजना का उद्देश्य केवल सरकारी
दफ्तरों के कागजों में सिमट कर रह जाती है।
एक
ऐसी ही योजना की शुरुआत उत्तर प्रदेश के योगी सरकार द्वारा की गई जिसके
तहत प्रदेश भर में गड्ढा युक्त सड़कों को 15 जून 2017 तक गड्ढा मुक्त करना
था ।योजना की शुरुआत के बाद भारी भरकम बजट भी खर्च किया गया जिसके तहत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 75 हजार किलोमीटर गड्ढा वाली सड़कों को गड्ढा मुक्त
करने का दावा लोक निर्माण विभाग के मंत्री और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद
मौर्य द्वारा किया गया।
योजना
के तहत गड्ढा मुक्त करने के दावे को जानने के लिए हमने बस्ती जिले के कुछ
सड़कों का पड़ताल किया लेकिन सरकारी आंकड़े और हकीकत को जानने के बाद यह
स्पष्ट है कि प्रदेश में गड्ढा मुक्त योजना के नाम पर बहुत बड़ा भ्रष्टाचार
हुआ है ।
हमारी पड़ताल में
मिला कि बस्ती जनपद में सड़कों को मरम्मत करने के नाम पर धन का बंदरबांट
जबरदस्त तरीके से किया गया है। जिसमे योजना के तहत 140 करोड़ से ज्यादा
रुपया खर्च कर दिया गया लेकिन नतीजा अभी सिफर है।
जिसमे
जिले की महत्वपूर्ण सड़क के रूप में कैली रोड़ की सड़क आती है इस सड़क को
आज तक पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड ठीक नहीं कर सका जबकि योजना के तहत एक करोड़
रुपये से अधिक का खर्च इस सड़क पर हो चुका है।
नेशनल
हाईवे के पटेल चौक से कटकर रोडवेज, रेलवे स्टेशन एवं जिला अस्पताल जाने
वाली पचपेडिया मार्ग पर योजना के तहत 40 लाख रुपया खर्च किया गया जिसके बाद
भी सड़क पर जगह जगह गड्ढे खत्म नही हुए इस सड़क को लेकर जिला प्रशासन की
काफी किरकिरी हुई जिसके बाद लगभग उतनी ही धनराशि एक बार फिर खर्च की
गई।लेकिन सड़क पर यात्रा करने के बाद ऐसा लगता है कि जिम्मेदार लोगों ने मन
बना लिया है कि " जी भर लूटेंगे-बोलोगे तो पीटेंगे" जरा इस सड़क पर एक बार
आप भी आइये।
पांडेय बाजार
से होते हुए बरदहिया और हाईवे की तरफ जाने वाली सड़क का निर्माण योजना के
तहत हुआ है लेकिन एक ही सड़क पर दो -दो मरम्मत करने के बाद सड़क का गड्ढा
युक्त रहना बड़ा सवाल खड़ा करता है।
गनेशपुर से चौरवा मार्ग को गड्ढा मुक्त योजना के तहत मरम्मत किया गया
लेकिन सड़कों पर 10-10 फिट के लंबे गड्ढे बताते हैं कि जिले के आलाधिकारी
समेत विभागीय अधिकारियों ने योजना के नाम पर खूब मलाई काटी।
आपके
सामने जो तस्वीर है ये भिरियाँ बाजार से अमरौली तक जाने वाली सड़क है
जिसको योजना के अंतर्गत गड्ढा मुक्त किये जाने का दावा किया गया है लेकिन
सच्चाई यह है कि सड़कों पर बड़े बड़े गड्ढे आज भी दिखाई दे रहे हैं।और दूसरी
बात यह है कि योजना के 6 माह पहले भी इस सड़क पर मरम्मत कार्य किया गया।
शिवाघाट
पैकोलिया मार्ग का निर्माण अभी हाल में ही हुआ है लेकिन सड़क निर्माण योजना
के अंतर्गत लगभग 1 करोड़ 98 लाख रुपया खर्च करने के एक महीने बाद सड़कों पर
बड़े बड़े गड्ढे हो गए हैं जो भ्रष्टाचार के बड़े कारनामे की तरफ संकेत करता
है।इस सड़क को देखने के बाद जिलाधिकारी राजशेखर के ईमानदारी पर सवाल खड़ा
होता है।
सल्टौआ मुड़वरा
मार्ग का निर्माण भी योजना आने के बाद हुआ है लेकिन भ्रष्टाचार कितने
व्यापक पैमाने पर फैला हुआ है इसका अन्दाजा तो इस सड़क पर आने के बाद ही पता
चलेगा जो बनने के महीने भर बाद ही ध्वस्त होने की कगार पर पंहुच गई।
जिनवा
चिरैयाडाड़ मार्ग को गड्ढा मुक्त योजना के तहत मरम्मत किया गया है लेकिन एक
बड़ा सवाल पैदा होता है कि सड़क पर पहले कोई 10-5 गड्ढे रहे होंगे तो इसपर
लाखो रुपये कैसे और कहां खर्च कर दिए गए ।
इसी
प्रकार जिले भर में 490 सड़कों पर गड्ढा मुक्त योजना के तहत कार्य किये गए
परन्तु इसमें सबसे बड़ा सवाल पीडब्लूडी प्रांतीय खंड के जिम्मेदारों पर खड़ा
होता है कि अभी तक जो सड़के गड्ढा युक्त थी वह वैसे ही हैं और जिनपर गड्ढे
नही थे ऐसे सड़कों को भी गड्ढामुक्त दिखा कर लाखों करोड़ों रुपये का घोटाला
कर लिया गया और सरकारी आंकड़े में प्रदेश की सड़कें गड्ढा मुक्त हो गई हैं।

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