ब्यूरो कानपुर -रवि गुप्ता
कानपुर - महाराष्ट्र की सरजमीं से बाहर निकलकर अब उत्तरप्रदेश के कानपुर की धरती पर पहली बार जाणता राजा महानाट्य का मंचन किया जाएगा इस मंचन को लेकर आम के साथ साथ खास जनता भी काफी उत्साहित नज़र आ रही है इस मंचन को लेकर जाणता राजा महानाट्य आयोजन समिति ने एक प्रेस वार्ता कर जनाकारी दी।
उनकी प्रेरणा और सीख से आगे बढ़ने का है यह कदम
वार्ता
के दौरान डॉक्टर उमेश पालीवाल ने बताया कि महाराष्ट्र के लिए जाणता राजा
का मंचन ईश्वर की पूजा के बराबर है बताया जाता है कि सन 1650 में
महाराष्ट्र की सरजमीं पर महानायक छत्रपति शिवाजी महाराज ने जन्म लिया भारत
के इतिहास में ऐसा महान योद्धा जिसने पूरे देश पर ऐसी छाप छोड़ी की आज भी हर
जुबान शिवाजी महाराज के गुण गाती है ईश्वर ने उन्हें असाधारण खूबियां दी
थीं व नौ सेना के जनक, गोरिल्ला युद्ध के जनक माने जाते हैं राजनीति के साथ
साथ उनकी दूर दृष्टि वीरता गुण और शान के किस्से गली गली सुने जाते है
उनके इन असाधारण गुणों को सीएसए में 20 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक चलने वाले
जाणता राजा महानाट्य में दर्शाया जाएगा
शिवाजी के जीवन पर आधारित यह महानाट्य
डॉक्टर
उमेश पालीवाल ने बताया कि शिवाजी के जीवन से प्रेरणा लेने के लिए इस नाटक
का मंचन किया जा रहा है इस नाटक ने सजीव रूप से राजा महाराजाओं के जीवन काल
से सम्बंधित शानोशौकत दर्शया जाएगा और घोड़े, ऊंट व हाथी भी प्रमुख रूप से
आकर्षण का केंद्र होंगे इस महानाट्य में विभिन्न जगहों से आने वाले 250 से
ज्यादा कलाकार अपने अपने हुनर का प्रदर्शन कर छत्रपति शिवा जी के जीवन शैली
को दर्शाएंगे। इस महानाट्य को प्रतिदिन 7 हज़ार से ज्यादा दर्शक देख
सकेंगे।
इस वार्ता के दौरान सह संयोजक नीतू सिंह, संयोजक स्वतंत्र कुमार अग्रवाल मौजुद रहे।


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