ब्यूरो कानपुर -रवि गुप्ता
कानपुर- शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के शहर में मौजूदगी के चलते एससी -एसटी एक्ट विरोधी मोर्चा के लोगों ने सैकड़ो की संख्या में एकजुट होकर सरकार द्वारा लागू किये गए एससी एसटी एक्ट के काले कानून का विरोध और नारेबाजी करते हुए सीएसए में राष्ट्रपति को ज्ञापन देने की कोशिश की।
लेकिन कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें बीच रास्ते मे ही पुलिस ने घेराबंदी कर रोक लिया इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस में तीखी झड़प और नोकझोंक भी हो गयी जिसके बाद आगे बढ़ने का विरोधी मोर्चा के लोगों ने प्रयास तो किया जहां वह सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे।
वोट बैंक की राजनीति कर रही सरकार
एससी-एसटी एक्ट विरोधी मोर्चा के लोगों ने इस एक्ट में बनाये गए कानून का विरोध करते हुए राष्ट्रपति को ज्ञापन देने के लिए चुन्नीगंज से सीएसए की ओर बढ़े ही थे कि राजीव पेट्रोल पम्प चौराहे के पास पुलिस बल ने विरोधी मोर्चे के जत्थे को रोक लिया और मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजे जाने का आश्वासन दिया काफी देर तक विरोधी मोर्चे व पुलिस के बीच मुँहचाही और नोक झोंक का दौर भी चला।
विरोधी मोर्चे के संजय सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी एसटी एक्ट का जो स्वरूप तय किया था उसी स्वरूप को लागू किया जाए न कि केंद्र सरकार उसमे संशोधन कर लागू कर दिया है जो कि उचित नही है
केंद्र सरकार वोट बैंक की राजनीति में इस काले कानून को लागू कर अपना उल्लू सीधा कर रही है इस कानून के लागू होने से राजनीतिक दल अपना फायदा उठाएंगे लेकिन सवर्णो को काफी क्षति उठानी पड़ेगी और उनकी मान मर्यादा तार तार हो जाएगी इन लोगो का कहना था कि इस एक्ट के चलते देश की 76 प्रतिशत आबादी को अन्याय का सामना करना पड़ेगा और देश के अंदरूनी हिस्सो में जातीय संघर्ष होने की संभावना बढ़ सकती है।
मोर्चा के सदस्य अरविंद राज त्रिपाठी ने कहा कि हम सवर्ण कभी भी एससी एसटी के लोगों पर अत्याचार नही करते है यह अत्याचार की परिभाषा केवल राजनीतिक दलों के लोग तय करते है और वही लोग हम लोगो को आपस मे भिड़ाकर राजनीतिक रोटियां सेंकते है और फिर हमारे ही वोटो के माध्यम से हमारे ऊपर ही राज करते है और अपने हुक्म चलाते है हमारी मांग है कि संसद द्वारा लागू किये गए एससी एसटी एक्ट को तत्काल संशोधित कर लागू किया जाए।
कानपुर- शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के शहर में मौजूदगी के चलते एससी -एसटी एक्ट विरोधी मोर्चा के लोगों ने सैकड़ो की संख्या में एकजुट होकर सरकार द्वारा लागू किये गए एससी एसटी एक्ट के काले कानून का विरोध और नारेबाजी करते हुए सीएसए में राष्ट्रपति को ज्ञापन देने की कोशिश की।
लेकिन कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें बीच रास्ते मे ही पुलिस ने घेराबंदी कर रोक लिया इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस में तीखी झड़प और नोकझोंक भी हो गयी जिसके बाद आगे बढ़ने का विरोधी मोर्चा के लोगों ने प्रयास तो किया जहां वह सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे।
वोट बैंक की राजनीति कर रही सरकार
एससी-एसटी एक्ट विरोधी मोर्चा के लोगों ने इस एक्ट में बनाये गए कानून का विरोध करते हुए राष्ट्रपति को ज्ञापन देने के लिए चुन्नीगंज से सीएसए की ओर बढ़े ही थे कि राजीव पेट्रोल पम्प चौराहे के पास पुलिस बल ने विरोधी मोर्चे के जत्थे को रोक लिया और मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजे जाने का आश्वासन दिया काफी देर तक विरोधी मोर्चे व पुलिस के बीच मुँहचाही और नोक झोंक का दौर भी चला।
विरोधी मोर्चे के संजय सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी एसटी एक्ट का जो स्वरूप तय किया था उसी स्वरूप को लागू किया जाए न कि केंद्र सरकार उसमे संशोधन कर लागू कर दिया है जो कि उचित नही है
केंद्र सरकार वोट बैंक की राजनीति में इस काले कानून को लागू कर अपना उल्लू सीधा कर रही है इस कानून के लागू होने से राजनीतिक दल अपना फायदा उठाएंगे लेकिन सवर्णो को काफी क्षति उठानी पड़ेगी और उनकी मान मर्यादा तार तार हो जाएगी इन लोगो का कहना था कि इस एक्ट के चलते देश की 76 प्रतिशत आबादी को अन्याय का सामना करना पड़ेगा और देश के अंदरूनी हिस्सो में जातीय संघर्ष होने की संभावना बढ़ सकती है।
मोर्चा के सदस्य अरविंद राज त्रिपाठी ने कहा कि हम सवर्ण कभी भी एससी एसटी के लोगों पर अत्याचार नही करते है यह अत्याचार की परिभाषा केवल राजनीतिक दलों के लोग तय करते है और वही लोग हम लोगो को आपस मे भिड़ाकर राजनीतिक रोटियां सेंकते है और फिर हमारे ही वोटो के माध्यम से हमारे ऊपर ही राज करते है और अपने हुक्म चलाते है हमारी मांग है कि संसद द्वारा लागू किये गए एससी एसटी एक्ट को तत्काल संशोधित कर लागू किया जाए।



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