रिपोर्ट - अरविन्द शर्मा
बेतहाशा बढ़ रही जनसंख्या
से संसाधनों में लगातार गिरावट हो रही है तेल और प्राकृतिक गैस जैसी ऊर्जा एक बार प्रयोग के बाद खत्म हो जाती है इसे पुनः प्रयोग में नहीं लाया जा
सकता है इसलिए इन्हें अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत कहते हैं दूसरी तरफ पवन
ऊर्जा,समुद्र में टरबाइन लगाकर लहरों से प्राप्त की गई ऊर्जा, तथा सौर
ऊर्जा को पुनः पुनः प्राप्त किया जा सकता है
इसलिए इन ऊर्जा के संसाधनों को
नवीकरणीय कहा जाता है उक्त बात सरस्वती शारदा विद्या मंदिर झींझक की
प्रधानाचार्य अर्चना ने सौर ऊर्जा पर रैली निकाले जाने से पूर्व नन्हे
मुन्ने बच्चों को समझाते हुए कहीं । आगे उन्होंने कहा कि अगर ऊर्जा को
संरक्षित नहीं किया गया तो भावी पीढ़ी को भविष्य में भयंकर कठिनाइयों का
सामना करना पड़ेगा इस रैली में नन्हे मुन्ने बच्चों ने भारत की कई भाषाओं
में लिखे हुए पोस्टर एवं स्लोगन हाथ में पकड़ रखे थे
जिसमें लिखा था सुनहरे
भविष्य के लिए ऊर्जा बचाएँ ,भविष्य की ऊर्जा सौर ऊर्जा,ऊर्जा है जीवन की
आस संरक्षण का करें प्रयास, यह रैली उक्त विद्यालय से प्रारंभ होकर झींझक
बस्ती ,ग्रामीण बैंक रेलवे क्रासिंग होते हुए सरस्वती शारदा विद्या मंदिर
झींझक में आकर समाप्त हुई ।रैली में शिक्षक शालिनी आलोक पाल आलोक
द्विवेदी ,आनन्द द्विवेदी प्रबंधक शिव कान्त त्रिपाठी,लव कुश सहित सौ से
अधिक बच्चे इस रैली में शामिल थे

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