रिपोर्ट -पुनीत मिश्रा
शहीद का सम्मान सर्वोपरि है। इसलिये देश के मान सम्मान के लिये जब भी जवान की शहादत की खबर आती है। उसके सम्मान मे हर कोई उठ खडा होता है और शासन प्रशासन उस परिवार की मौलिक सुविधाओ का बेहद ध्यान रखता है। लेकिन जनपद फर्रुखाबाद के इस गांव मौधा मे शहीदो के सम्मान का अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है।
विकास खण्ड मोहम्दाबाद क्षेत्र के गांव मौधा में लगभग 98 प्रतिशत सैनिको के घर है गांव में 2 प्रतिशत लोग गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार है जो सरकार की तरफ से मदद मिले उसके लिए आस लगाए बैठे है। इस ग्राम पंचायत में पांच गांव और लगते है लेकिन इसी गांव की जनसंख्या लगभग आठ हजार है जिसमे 28 सौ वोटर है। इस गांव की महिलाएं शौच करने के लिए आड़ खोजने के चक्कर मे काफी दूर जाकर शौच क्रिया करनी पड़ती है।
गरीब लोग अपनी इज्जत सबसे सामने दिखाने पर मजबूर क्यो हो रही है इस गांव की महिलाये । इस शहीदों के गांव में कुछ गरीब परिवार रहते है उन परिवारों की महिलाओं के पति मजदूरी करके सिर्फ अपने परिवार का पालन पोषण ही कर पाते है। लेकिन शौचालय बनाने के लिए उनके पास रुपया नही है।वही ग्राम प्रधान संजीव देवी जो कि विडो है। गांव की प्रधानी के लिए महिला प्रधान के जेठ सन्तोष यादव जो शिक्षक है वही सभी विकास कार्य देखते है।
जब गांव गरीबो को खुले में शौच जाते है उनके शौचालय बनवाने के रुपया नही है तो शौचालय कहा से बनवाये जाये। साथ मे यह भी कहा कि मेरा गांव ओडीएफ नही हुआ है। खुले में शौच को लेकर सीडीओ अपूर्वा दुबे से बात की तो उन्होंने बताया कि 2012 सर्वे गाइड लाइन के हिसाब से जिला ओडीएफ घोषित किया गया है। जिस गांव में अभी भी शौचालय की जरूरत है। उनका सर्वे कराया जा है हर घर मे शौचालय होगा।
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