रिपोर्ट-अरविन्द कुमार शर्मा
धार्मिक
सौहार्द एवं विशिष्ट संवाद शैली के कारण झींझक की रामलीला दूर दराज तक
विख्यात है। यही कारण है कि उत्तर भारत के कई बेहतरीन कलाकार झींझक की
रामलीला में अपने अभिनय का प्रदर्शन करने के लिए उत्सुक रहते हैं। दरअसल
कानपुर देहात की सबसे प्राचीन रामलीला होने के चलते मंचन से जुड़ा उत्तर
भारत का शायद ही कोई कलाकार होगा,
जो झींझक के रामलीला के मंच पर अपनी कला
के प्रदर्शन के लिए न आया हो। 47 वर्षों से हो रहे इस लीला कार्यक्रम के
साथ विजय दशमी महोत्सव भी बखूबी मनाया जाता है। इस भव्य कार्यक्रम के लिए
आदर्श रामलीला कमेटी एवं नगर वासियों से चंदे के रूप में सहयोग लिया जाता
है। वर्तमान में इस रामलीला में करीब 10 से 12 लाख का खर्च वहन किया जाता
है। बताया जाता है कि झींझक निवासी गुड्डू सिंह ने इस रामलीला कार्यक्रम का
शुभारंभ 1971 कराया था।
सरकारी भूमि पर विख्यात कलाकार करते हैं मंचन
इस
लीला मंचन में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाले सबसे प्राचीन कलाकार शोभन
सरकार नाट्य कला मंच के मंडलाधीश ज्ञानेंद्र मिश्रा उर्फ ज्ञानू, जो सभी
भूमिका में पारंगत हैं। बताया गया कि शुरुवात में लीला का कोई स्थान
सुनिश्चित न होने से प्रत्येक वर्ष इसका स्थल बदलता था लेकिन बाद में आपसी
सदभाव व वार्ता के बाद 1997 से यह लीला मंचन नगर के जूनियर हाईस्कूल मैदान
में होने लगी। हालांकि यह सरकारी भूमि परिसर बड़ा होने से दशहरा मेला में
भारी भीड़ समाहित होने में परेशानी नही होती है।
कमेटी के अध्यक्ष धुन्नू
सिंह कहते हैं कि कानपुर और आसपास के क्षेत्र में झींझक की संवाद प्रधान
रामलीला होती है, जिसका अपना एक अलग महत्व होता है। वहीं अयोध्या और
चित्रकूट जैसी जगहों में दर्शन प्रधान रामलीला होती है। झींझक की रामलीला
भी काफी पुरानी है। इसलिए उत्तर भारत में अपनी अभिनय कला का लोहा मनवा चुके
कई कलाकार झींझक के मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं, जिसे झींझक
वासियों ने भी काफी सराहा है।
सुरक्षा के है ये विशेष इंतजाम
झींझक
कस्बे में होने वाली रामलीला में सुरक्षा के लिए भी विशेष प्रबंध किये
जाते हैं। इसके लिए कमेटी के मुख्य व्यवस्थापक संतोष त्रिपाठी ने बताया कि
इस रामलीला में कलाकारों का अभिनय देखने के लिए करीब 23 गांव के लोग उमड़ते
हैं। इस बार असमाजिक घटनाओं को रोकने के लिए रामलीला ग्राउंड के आसपास
सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।वहीं थाना मंगलपुर के थानाध्यक्ष तुलसीराम
पांडेय ने बताया कि दशहरा मेले में सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए जाएंगे।
साथ ही हर रोज एक वॉच टॉवर के माध्यम से असामाजिक तत्वों पर नजर रखी जा रही
है।
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