ब्यूरो कानपुर -रवि गुप्ता
शारदीय नवरात्रि के मौके पर तहक़ीकात न्यूज़ आपको शहर के प्राचीन मंदिरों से हर दिन रूबरू करा रहा है इसी कड़ी में आज आपको शहर के प्राचीन मंदिर के दर्शन करा रहा है ।कानपुर की इन तंग गलियों के बीच बंगाली मोहाल में बना यह मां काली का यह प्राचीन मन्दिर है इस मंदिर की यह मान्यता है की जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से माँ के दरबार में आकर माता से मनोकामना मांगता है उसकी सभी मुराद माता जरूर पूरी करती है माँ काली से मनोकामना मागने के साथ श्रद्धालु माता के मंदिर में एक ताला बांधते है उसकी माता सभी मनोकामनाएं पूरी कर देती है मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु माता के दरबार में श्रद्धालु ताला खोल कर माता का भव्य श्रृंगार और आरती कराते है इस मंदिर में आम दिनों में तो यहाँ भीड़ रहती है ही लेकिन नवरात्रि के दिनों मंदिर में हर दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। यह मंदिर शहर में ताला वाला मन्दिर के नाम से जाना जाता है
ताला वाली देवी बरसाती है कृपा
शहर के बंगाली मोहाल की ऐसी तंग गलियों के बीच बना यह माता काली का यह मंदिर ताला वाली देवी के नाम से प्रसिद्ध है।
ताला वाली देवी बरसाती है कृपा
शहर के बंगाली मोहाल की ऐसी तंग गलियों के बीच बना यह माता काली का यह मंदिर ताला वाली देवी के नाम से प्रसिद्ध है।
हालंकि इस मन्दिर को कब और किसने बनवाया साथ ही माँ काली यहां कैसे विराजमान हुई इसकी सत्यता किसी को पता नही है। लेकिन ऐसा बताया जाता है बहुत पहले एक महिला भक्त परेशान रहा करती थी और वह अपनी परेशानी लेकर मन्दिर में माता के दर्शन के लिए प्रतिदिन हाजिरी लगाने लगी एक बार वह महिला मन्दिर प्रांगण में ताला लगाने लगी जिसपर पुरोहित ने कहा कि यह ताला क्यो लगा रही हो तब उसने कहा कि मां ने सपने में कहा था कि मेरे नाम से प्रांगण में एक ताला लगा देना तुम्हारी मनोकामना पूरी हो जाएगी ।ओर कुछ समय बाद उसकी मनोकामना पूरी हो गई ।तबसे इस काली माता मंदिर का नाम ताला वाली देवी पड़ गया और तबसे ही यहां श्रद्धालु मन्नत के चलते एक ताला प्रांगण में लगा देते है और जब उनकी मन्नत पूरी हो जाती है तो वह ताला खोल देते है। मन्दिर प्रांगण में हज़ारो की तादाद में भक्त अपने अपने ताले लगा कर चले जाते है और जब वह वापस खोलने के लिए आते है तो उन हज़ारो तालों में उन्हें अपना ताला खोजने में कभी कभी सफलता नही मिलती है तो उस ताले की चाबी को माता के पास ही रख देते हैं। ऐसा भी बताया जाता है कि प्राचीन काल मे इस मन्दिर से सटकर गंगा जी निकलती थी। पुजारी आशीष चौधरी ने बताया कि यह मंदिर लगभग 300 वर्ष से ज्यादा पुराना है यहां ताला लगाने की ऐसी मान्यता है जब किसी का कोई काम नही बनता है तो वह भक्त माता की पूजा अर्चना कर एक ताला यहां लगा देते है और उनकी जब मन्नत पुरी हो जाती है तब वह इसे खोल लेते है। माता के दर्शन के लिए यहां दूर दूर से भक्त दर्शन के लिए आते है और मन्नत मांगकर प्रांगण में ताला लगा देते हैं।
माता ने हमेशा हमारी सुनी
दर्शन करने आई भक्त राधा ने बताया कि मंदिर में ताला बांध कर माता से जो भी मुराद मांगो वह जरूर पूरी होती है उसके बाद मां का श्रृंगार किया जाता है हमे पूरा विश्वास रहता है कि माता हमारी मुरादे जरूर पूरी करेगी। रानू ने बताया कि यहां दर्शन के लिए लगातार आते रहते है बहुत ही सिद्ध देवी का मंदिर है अपनी मां को लेकर यहाँ आये हुए थे ताला बांधकर मन्नत मांगी थी जो पूरी हो गयी।



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