विश्वपति वर्मा (सौरभ)
अर्थलाभ के लिए भारत ही नही विश्व भर में वेश्यावृत्ति का एक बड़ा बाजार सजता रहा है जिसे एक बड़ी महिला आबादी अपने आजीविका का साधन मानती रही है।
वर्तमान ही नही प्राचीन काल से इसका प्रचलन चल रहा है लेकिन जब भारत जैसे देश मे लोकतंत्र और संस्कृति की बात होती है तब भी इसपर पाबंदी लगाने पर सरकार द्वारा कोई कदम नही उठाया गया है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
उठाये भी कैसे वेश्यावृत्ति पर पाबंदी लगाने के लिए सरकार को उन महिलाओं के लिए रोजगार उपलब्ध करवाने होंगे जो इस धंधे में उतर गई हैं लेकिन न तो सरकारों द्वारा इन्हें रोजगार के साधन उपलब्ध कराए गए और न ही
अन्यथा देह व्यापार भारत के बड़े शहरों से निकल कर अब भारत के गांवों की तरफ भी बढ़ रहा है ,जंहा लड़कियां अपने जरूरत को पूरा करने के लिए पहले प्यार फिर प्यार में धोखा खाने के बाद अपने आपको ही कमाई का साधन मान लेती हैं।
दूसरी तरफ लड़कियों के शरीर को आजीविका का साधन मानते हुए मानव तस्करी का काम भी रुकने का नाम नही ले रहा है ,और गांव से निकलने वाली लड़कियों को चकाचौंध की रोशनी दिखा उन्हें देह व्यापार के धंधे में लिप्त करा दिया जा रहा है।
ऐसे स्थिति को देखते हुए सरकार ही नही मानवाधिकार आयोग को भी इस पर गंभीरता बरतनी चाहिए नही तो भारत की आत्मा बसने वाली गांवों में भी लड़कियों को हेय दृष्टि से देखा जाएगा।
अर्थलाभ के लिए भारत ही नही विश्व भर में वेश्यावृत्ति का एक बड़ा बाजार सजता रहा है जिसे एक बड़ी महिला आबादी अपने आजीविका का साधन मानती रही है।
वर्तमान ही नही प्राचीन काल से इसका प्रचलन चल रहा है लेकिन जब भारत जैसे देश मे लोकतंत्र और संस्कृति की बात होती है तब भी इसपर पाबंदी लगाने पर सरकार द्वारा कोई कदम नही उठाया गया है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
उठाये भी कैसे वेश्यावृत्ति पर पाबंदी लगाने के लिए सरकार को उन महिलाओं के लिए रोजगार उपलब्ध करवाने होंगे जो इस धंधे में उतर गई हैं लेकिन न तो सरकारों द्वारा इन्हें रोजगार के साधन उपलब्ध कराए गए और न ही
अन्यथा देह व्यापार भारत के बड़े शहरों से निकल कर अब भारत के गांवों की तरफ भी बढ़ रहा है ,जंहा लड़कियां अपने जरूरत को पूरा करने के लिए पहले प्यार फिर प्यार में धोखा खाने के बाद अपने आपको ही कमाई का साधन मान लेती हैं।
दूसरी तरफ लड़कियों के शरीर को आजीविका का साधन मानते हुए मानव तस्करी का काम भी रुकने का नाम नही ले रहा है ,और गांव से निकलने वाली लड़कियों को चकाचौंध की रोशनी दिखा उन्हें देह व्यापार के धंधे में लिप्त करा दिया जा रहा है।
ऐसे स्थिति को देखते हुए सरकार ही नही मानवाधिकार आयोग को भी इस पर गंभीरता बरतनी चाहिए नही तो भारत की आत्मा बसने वाली गांवों में भी लड़कियों को हेय दृष्टि से देखा जाएगा।

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