रिपोर्ट - अरिवन्द शर्मा
जहाँ एक तरफ देश में गाय को माता का दर्जा दिया गया है कहते हैं कि गाय माता के शरीर में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है और यही वजह है कि गाय की पूजा सदियों से होती चली आ रही है तो वहीं दूसरी तरफ गाय बछड़ों की स्थिति नाजुक और दैनीय बनी हुई है अगर बात करें किसानों की तो वह अपने घर मैं गाय तब तक रखता है
जब तक वह दूध देती है इसके बाद वह गाय को छोड़ देते हैं वही खेतो पर लगाय गए कटीले तारों से गाय का शरीर घायल हो जाता है और उनका जीवन कष्टकारी हो जाता है इन सभी हालातों के बीच कानपुर देहात जनपद में मैंथा तहसील के शिवली क्षेत्र में बनी एक राघव गोवर्धन गौ शाला में ऐसी कटीले तारों से घायल गायों की देख रेख व इलाज और उनके खाने पीने की व्यवस्थाएं की जाती है और गोपाष्टमी के उपलक्ष में एक आयोजन किया गया है जिसमें यज्ञ के साथ विशाल भंडारा भी किया गया है जिसमे आस पास से आये लोग मौजूद रहे

यह हम नही कह रहे बल्कि आप तस्वीरों में साफ देख सकते है कि किस तरह राघव शुक्ला अपनी उम्र से बड़ा काम कर रहे हैं इन की उम्र महेज 26 वर्ष ही होगी और ऐसी उम्र में लोग अपनी शौक पूरी करने में मस्त रहते हैं लेकिन राघव शुक्ला ने एक अलग ही बीड़ा उठाया है इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनों के लिए समय नहीं निकाल पाते लेकिन राघव शुक्ला व उनके सहयोगी अनिल त्रिपाठी अपना ज्यादा से ज्यादा समय गाय की सेवा में लगाते हैं
और कोशिश करते हैं कि उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी ना हो जब हमारी बात राघव शुक्ला से हुई तो उन्होंने बताया कि कई सालो वह इस जिम्मेदारी का निर्वाह करते चले आ रहे हैं उनका मानना है कि सभी देवी देवता गाय में ही विराजमान है तो फिर कहीं और जाने की जरुरत ही क्या है
जहाँ एक तरफ देश में गाय को माता का दर्जा दिया गया है कहते हैं कि गाय माता के शरीर में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है और यही वजह है कि गाय की पूजा सदियों से होती चली आ रही है तो वहीं दूसरी तरफ गाय बछड़ों की स्थिति नाजुक और दैनीय बनी हुई है अगर बात करें किसानों की तो वह अपने घर मैं गाय तब तक रखता है
यह हम नही कह रहे बल्कि आप तस्वीरों में साफ देख सकते है कि किस तरह राघव शुक्ला अपनी उम्र से बड़ा काम कर रहे हैं इन की उम्र महेज 26 वर्ष ही होगी और ऐसी उम्र में लोग अपनी शौक पूरी करने में मस्त रहते हैं लेकिन राघव शुक्ला ने एक अलग ही बीड़ा उठाया है इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनों के लिए समय नहीं निकाल पाते लेकिन राघव शुक्ला व उनके सहयोगी अनिल त्रिपाठी अपना ज्यादा से ज्यादा समय गाय की सेवा में लगाते हैं
और कोशिश करते हैं कि उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी ना हो जब हमारी बात राघव शुक्ला से हुई तो उन्होंने बताया कि कई सालो वह इस जिम्मेदारी का निर्वाह करते चले आ रहे हैं उनका मानना है कि सभी देवी देवता गाय में ही विराजमान है तो फिर कहीं और जाने की जरुरत ही क्या है
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