ब्यूरो कानपुर - रवि गुप्ता
शाहके
के बहुचर्चित दिव्या हत्याकांड मामले में 8 साल बाद पीड़ित परिवार को कोर्ट
के आदेश पर न्याय मिला। हत्याकांड में एडीजे सेकेंड ज्योति कुमार
त्रिपाठी ने केस की सुनवाई करते हुए बुधवार को फैसला सुनाया। आपको बता दें
कि आठ साल पहले दिव्या को स्कूल प्रबंधक के बेटे पीयूष ने रेप के बाद मार
डाला था इस मामले में कोर्ट ने मुख्य अभियुक्त पीयूष को आजीवन कारावास के
साथ 75 हजार जुर्माना लगाया है जबकि उसके भाई और सहयोगी को कारावास की सजा
सुनाई है और इस वारदात में एक आरोपी को रिहा कर दिया गया है ।
आठ साल पहले 27 सितंबर 2010 में बच्ची दिव्या के साथ उसके ही स्कूल भारतीय ज्ञानस्थली में दरिंदगी के बाद उसकी मौत हो गयी थी और दिव्या की मौत से पूरे कानपुर शहर में हंगामा मच गया था। महीनो चले धरना प्रदर्शन के बाद क्षेत्र के डिप्टी एसपी से लेकर एसपी तक को सस्पेंड किया गया था मामला यही नहीं रुका था उस समय के डीआईजी प्रेम प्रकश का ट्रांसफर तक कर दिया गया था। इस घटना से आहत दिव्या की मां सोनू भदौरिया न्याय के मंदिर से इंसाफ की आस लगाए बैठी थी लंबी लड़ाई में उसने कई उतार चढ़ाव देखे जांच की लंबी प्रक्रिया का हिस्सा बनी थाने और कोर्ट के कई चक्कर लगाती रही. लेकिन अंततः उसको न्याय मिला और आरोपियों को सजा मिली . कानून के क्षेत्र में पुराना जुमला है कि देरी से मिला न्याय, न्याय नहीं होता फिर भी आज उस मां सोनू भदौरिया के दिल को बहुत सुकून मिला होगा जिसने अपनी बेटी की लाश अपने कन्धे पर ढोयी थी। दिल्ली के निर्भया काण्ड का तरह पूरे उत्तर प्रदेश को गुस्से में भर देने वाला दिव्या काण्ड 27 सितम्बर 2010 का है जब कानपुर के एक निजी स्कूल मालिक पीयूष ने कक्षा छह की छात्रा के साथ बलात्कार कर उसे मरने के लिये घर के बाहर फेंक दिया था।
और उनके तीन सहयोगियों ने पीयूष का साथ देकर पीयूष को बचाने के लिए बात छिपाई थी। इस केस में आज कानपुर की सेशन कोर्ट ने बलात्कार के मुख्य आरोपी पीयूष वर्मा को उम्र कैद की सजा सुनाई है और मदद करने वाले उसके भाई मुकेश व सह अभियुक्त सुधीर वर्मा को साधारण कारावास की सजा दी है जबकि चंद्रपाल को बरी कर दिया गया। अपर सत्र न्यायाधीश ने फैसला सुनाने की पिछली तारीख 15 सितम्बर मुकर्रर की थी। कोर्ट ने चार गवाहों को पहली अक्टूबर को फिर से तलब करते हुए फैसले सुनाना स्थगित कर दिया। दिव्या केस में ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब कोर्ट ने फैसले की तारीख आगे बढ़ाई हो। लेकिन बुधवार को आखिरकार इन्साफ हुआ।दिव्या की माॅ सोनू भदौरिया रुंधे गले से कोर्ट के इस फैसले से पूरी तरह सन्तुष्ट नहीं है। मुख्य आरोपी पीयूष वर्मा के पिता और स्कूल मालिक चन्द्र पाल वर्मा को रिहा किये जाने व दो आरोपियों को कम सजा दिए जाने पर आपत्ति जतायी है और इसके खिलाफ अपीलीय कोर्ट में जाने का ऐलान किया है। सोनू का कहना है कि ऐसी घटना में यह सजा कम है फांसी होनी चाहिए थी लेकिन एक को उम्र कैद दी गयी लेकिन दो और आरोपी सन्तोष और मुकेश वर्मा को जिन्होंने सब छिपाया उन्हें कम सजा दी गयी और चंद्रपाल को रिहा कर दिया इससे संतुष्ट नहीं हूं इन लोगों ने पीयूष को बचाने के लिए सब छिपाया था और सब गलत बताया था अब आगे हाइक्रोर्ट का सहारा लेंगे। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अजय भदौरिया ने बताया कि बहुचर्चित दिव्याकाण्ड में पुलिस की जांच के बाद 27 दिन के बाद इसकी जांच सीबीसीआईडी को दे दिया गया। जिसमें आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल करने के बाद मुकदमा शुरू हुआ जिसमें दो बिंदुओं पर जोर दिया एक डीएनए और आरोपी पीयूष वर्मा की उपलब्धता उस क्षेत्र में कहा थी। जिसमे डीएनए की स्वीकार्यता 99.99 प्रतिशत है। इसमें जो मुकेश वर्मा उन्नाव में थे दिव्या की मां सोनू भदौरिया ने
28
सितंबर 2010 को ही पीयूष के खिलाफ शिकायत की बेटी के साथ दुराचार हुआ उसके
बावजूद 16 दिन तक उसे गिरफ्तार नही किया गया इसमें पुलिस की लापरवाही साफ
दिखाई दी थी न्याय न मिलने के बाद सोनू ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की
मांग की थी जो मामला अभी तक लंबित चल रहा था तत्कालीन शासन ने इस मामले की
सीबीसीआईडी जांच की
जिसमें मुख्य बिंदु डीएनए और पीयूष की क्षेत्र में उपलब्धता और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था
पीयूष को आजीवन कारावास और 10 वर्ष की सजा दी गयी है जबकि दो अन्य लोगों को कुछ सजा कम हुई है और चंद्रपाल को बरी किया गया है।



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