रिपोर्ट -पुनीत मिश्रा
बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने आज यहां कहा कि भारत और पाकिस्तान को यह मान लेना चाहिए कि वह एक दूसरे को समाप्त नहीं कर सकते इसलिए बातचीत से मामलों को सुलझाएं और प्रेम से रहे उन्होंने कहा कि विनोवा भावे ने अफगानिस्तान वर्मा श्रीलंका को समाहित करते हुए भारत की अवधारणा रखी थी यह आज भी प्रासंगिक है उन्होंने कहा कि भारत और चीन एक दूसरे को नष्ट करने की स्थिति में नहीं है इसलिए दोनों को सामंजस्य के साथ एक दूसरे के साथ एक परिवार की तरह रहना चाहिए आज भी हिंदी चीनी भाई भाई का नारा सार्थक है
विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल संकिसा में युद्ध बुद्धिस्ट सोसायटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने से पहले पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने भारत चीन और पाकिस्तान संबंधों तथा तिब्बत और कश्मीर समस्या पर बेबाकी से विचार रखें उन्होंने भारत और चाइना के रिश्तो को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत और चीन एक दूसरे को नष्ट करने की स्थिति में नहीं है इसलिए दोनों को सामंजस्य के साथ एक दूसरे के साथ एक परिवार की तरह रहना चाहिए पति-पत्नी जिस तरह एक दूसरे से झगड़ते हैं लेकिन रहते साथ में है उन्होंने कहा कि चीन और भारत एक दूसरे के लिए आर्थिक आवश्यकता भी है आज भी हिंदी चीनी भाई भाई का नारा सार्थक है यदि ऐसा हो सके तो पाकिस्तान की समस्या अपने आप समाप्त हो जाएगी वैसे भी चाइना वह मुल्क है जिसमें एक भारतीय धर्म के सर्वाधिक मताबलंबी रहते हैं
तिब्बत के बारे में भारत के रवैया को बताते हुए दलाई लामा ने कहा कि एक बार पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने उनके सामने चीन का भाग होने और चीन के भीतर एक देश होने के बीच का अंतर बताया था हम आज भी वही खड़े हैं संयुक्त राष्ट्र में 1959 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने तिब्बत का मुद्दा जरूर रखा था उसके बाद से कोई बड़ी पहल नहीं हुई हालांकि उन्होंने माना कि यूनियन में तिब्बत मसले पर बातचीत की पहल होनी चाहिए वह तिब्बत मामले का हल युद्ध में नहीं देखते वे बताते हैं
कि चीनी इतिहास और साहित्य इस बात का गवाह है कि तिब्बत हमेशा से एक
स्वतंत्र देश था इतिहास में 7 वीं शताब्दी में एक तिब्बती राजा के चीनी
राजकुमारी से विवाह का भी उल्लेख मिलता है यदि वह बुद्धिस्ट संत ना होते तो
शांति के लिए आज भी किसी चीनी राजकुमारी से शादी करने को राजी हो जाते
अपनी एक मुलाकात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विनोवा भावे ने
अफगानिस्तान वर्मा श्रीलंका को समाहित करते हुए भारत की अवधारणा रखी थी यह
आज भी प्रासंगिक है यदि ऐसा होता तो आज पाकिस्तान की समस्या ना होती
पाकिस्तान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर इसका फैसला नहीं
होना चाहिए आज भी सीरिया अफगानिस्तान और खुद पाकिस्तान में ही शिया और
सुन्नी आपस में एक दूसरे की हत्या कर रहे हैं विश्व शांति पर उन्होंने कहा
कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद शायद दुनिया को समझ आ गई है यूरोपियन यूनियन
जैसे मंच इसकी मिसाल है फिर भी हमें शांति की दिशा में अभी दूर तक जाना है
वह बताते हैं कि वर्ष 2001 से वह राजनीति से रिटायर हो चुके हैं और अब अपना
पूरा जीवन उन्होंने शांति को समर्पित कर दिया है उन्होंने कहा कि महात्मा
गांधी एक महान नेता थे वास्तव में वह भारत के बंटवारे के विरोधी थे आज यदि
भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश एक होते तो भारत और मजबूत होता उन्होंने कहा
कि भारत और पाकिस्तान को भी मान लेना चाहिए कि वह एक दूसरे को समाप्त नहीं
कर सकते इसलिए बातचीत से मामलों को समझाएं और प्रेम से रहे चीन के सीमा
विवाद पर उन्होंने कहा कि चीन हमेशा से विस्तारवादी मानसिकता का रहा है
तिब्बत उसका एक उदाहरण मंगोलिया तिब्बत चीन वाल और पीली नदी चीन की
प्राकृतिक सीमाएं हैं
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