जिला संवाददाता आजमगढ़
देश बेरोजगारी के दलदल में समाता जा रहा है, अमीर
और अमीर बनने की ओर अग्रसर है और गरीब और गरीबी की ओर। गरीब व निरीह जनता
सत्ता के लालची नेताओं के मकड़जाल में निरंतर फंसती जा रही हैं।
नेताओं द्वारा लुभावने प्रलोभन देकर जनता को अपना वोट बैंक बनाने के बाद वादों से मुकरने की संस्कृति बन गई है। गरीब, बेरोजगार, किसान, उद्यमी हर नई सरकार के आने पर उम्मीद करता है कि उनके लिए कुछ अच्छा होगा किन्तु फिर वहीं ढांक के तीन पात की भांति अपने को ठगा महसूस करता है। ठगा हुआ मतदाता यह निर्णय करता है कि अगली बार वह ऐसी सरकार नहीं बनाएंगे, परंतु विकल्प के अभाव में वह उन्ही छलने वाली पार्टियों में से ही चुनने को बाध्य हैं।प्रगतिशील भोजपुरी समाज एवं प्राउटिष्ट फोरम के तत्वावधान में आज़मगढ़ में आयोजित त्रिदिवसीय प्रउत प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षक राजेश सिंह ने उपरोक्त बातों को कहा। उन्होंने आगे बताया कि भारत ही नही बल्कि संपूर्ण विश्व में व्याप्त आर्थिक शोषण एवम विषमता तथा हो रहे आर्थिक उथल-पुथल सहित सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का एक मात्र समाधान प्रगतिशील उपयोग तत्व (प्रउत) है।प्रगतिशील भोजपुरी समाज एवं प्राउटिष्ट फोरम के तत्वावधान में आनंद गढ़ भोजपुरी सेवा संस्थान गड़हन खुर्द मेहमौनी आजमगढ़ में प्रउत प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में गोरखपुर, बस्ती, देवरिया, मऊ एवं बिहार के कई भोजपुरी भाषी जिले के लोगों के द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया गया। दिल्ली से आए मुख्य प्रशिक्षक राजेश सिंह एवं दिनपाल रायजी के द्वारा प्रउत कैसे समाधान के विषय पर गहन चर्चा की गई।
राजेश सिंह ने बताया कि जिस तरह से बबूल के पेड़ से आम नहीं प्राप्त किया जा सकता उसी भांति बिना गुणवत्ता के व्यक्तित्व से अच्छा शासन और समाज सेवा की उम्मीद नहीं की जा सकती है। वर्तमान समय में पूंजीपतियों , अपराधियों एवं मठाधीशों के द्वारा चुनाव लड़ा जाता है और अपने प्रभाव के कारण चुनाव जीत लिया जाता है किन्तु एक जनप्रतिनिधि में जो गुण होने चाहिए उससे यह लोग कोई वास्ता नहीं रखते जिसका नतीजा यह निकलता है कि जहां विकास एवं प्रगति होनी चाहिए वहां पतन होने लगता है।प्रशिक्षण शिविर के साथ ही प्रगतिशील भोजपुरी समाज के कार्यकर्ताओं की बैठक हुई जिसमें भोजपुरी भाषा मे व्यपात अश्लीलता, भोजपुरी राज्य का निर्माण, वाराणसी (काशीराज) को राजधानी बनाने और भोजपुरी क्षेत्र के विकास के मांग को लेकर 11फरवरी, 2019 को बिहार के भोजपुरी भाषी जिले और 18 फरवरी, 2019 को उत्तर प्रदेश के भोजपुरी भाषा-भाषी जिले में एक दिवसीय धरना और प्रदर्शन का कार्यक्रम सुनिश्चित किया गया।
इस
कार्यक्रम के आयोजन और सफलता में दिनपाल रॉयजी,कैलाशनाथ सिंह,रविंद्रजी और सुधीर कुशवाहा सहित अन्य लोगों का योगदान उल्लेखनीय है।


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