लखनऊ - ब्यूरो महेंद्र मिश्रा
उ0प्र0 सरकार ने शीत सत्र के समय को सिर्फ चार दिन तक सीमित करके यह प्रमाणित किया है कि सरकार प्रदेश के महत्वपूर्ण जनहित के विषय एवं मुद्दों से बचने के लिए चर्चा से भाग रही है।
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने आज जारी बयान में कहा कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जी ने सरकार गठन के पश्चात ज्ञानशील, एकता एवं संसदीय परम्परा का उल्लेख करते हुए विपक्ष एवं उ0प्र0 की जनता से वादा किया था कि हम 90 दिन सदन चलायेंगे और जनता से जुड़े प्रदेश के सभी विषयों पर संवाद एवं चर्चा करेंगे लेकिन आज हकीकत यह है कि 90 दिन तो दूर 50 प्रतिशत भी सदन की कार्यवाही नहीं चली, शीत सत्र को छोड़कर मात्र 21 दिन एवं यदि शीत सत्र को जोड़ दिया जाय तो सिर्फ 25 दिन ही सदन की कार्यवाही चली जो कि 22 करोड़ जनसंख्या वाले उत्तर प्रदेश के लिए काफी कम है सरकार का इस तरीके से सदन के समय को कम करना और चर्चा से भागना यह साबित करता है कि पिछले बीस माह की भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश के जनमानस के प्रति कतई गंभीर नहीं है। यदि 20 माह में सरकार की कोई उपलब्धियां होतीं तो यह विशेष तौर पर चर्चा के लिए सजग होते।
प्रवक्ता
ने कहा कि सरकार गंभीर मुद्दों जैसे बेरोजगारी, किसानों की समस्या, ध्वस्त
कानून व्यवस्था और अभी हाल ही में बुलन्दशहर में भड़के दंगे पर चर्चा से
बचने के लिए सत्र को सीमित कर मात्र चार ही दिन में समाप्त करना चाहती है।
सरकार लोकतंत्र एवं विधानसभा के प्रति कितनी गंभीर है यह अपने आप में स्वतः
स्पष्ट हो जाता है।

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