कैलाश सिंह विकाश ब्यूरो वाराणसी
पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत चलाये जा रहे टीबी सक्रिय खोज अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं| इसी क्रम में आज मुख्य चिकित्सा कार्यालय में अपर निदेशक डॉ बी. एन. सिंह की अध्यक्षता में प्रेस वार्ता और अन्तर्विभागीय बैठक का आयोजन किया गया|
पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत चलाये जा रहे टीबी सक्रिय खोज अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं| इसी क्रम में आज मुख्य चिकित्सा कार्यालय में अपर निदेशक डॉ बी. एन. सिंह की अध्यक्षता में प्रेस वार्ता और अन्तर्विभागीय बैठक का आयोजन किया गया|
इस दौरान डॉ बी. एन. सिंह ने बताया कि यह दस दिवसीय अभियान 21 जनवरी से प्रारंभ होकर 1 फरवरी तक चलाया जायेगाl टीम चयनित क्षेत्रों के घर जाकर, घर में उपस्थित सभी सदस्यों की स्क्रीनिंग करेगी, जिसमें उनको लक्षण के बारे में जानकारी दी जाएगी| उन्होंने कहा कि टीबी की बीमारी पहचानने पर तुरंत ही उसका इलाज शुरू किया जाए, जिससे टीबी की बीमारी को कम समय में रोका जा सके|
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ वी. बी. सिंह ने कहा कि टीबी सक्रिय खोज अभियान के तहत जनपद में इसका 6वां चरण चलाया जायेगा| इस अभियान में कुल जनसंख्या के 10 फीसदी लोगों को लक्षित किया गया है| जिले के मंडलीय एवं सभी राजकीय चिकित्सालयों व सभी प्राथमिक व् सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में टीबी की जांच व् इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध करायी जा रही है, साथ ही मरीज की सुविधा के लिए उनके निवास के नजदीक ही डॉट्स केंद्र बनाये गए हैं|
उन्होंने कहा कि अभियान में पॉजिटिव पाए जाने पर मरीजों की सी.बी. नाट जांच कराई जाएगी तथा मरीज एवं उनके परिवार का लगातार फॉलो अप भी किया जायेगा| पूर्व के अभियानों में जनपद की 60 फीसदी से अधिक जनसंख्या को कवर किया जा चुका है| टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य 2025 तक रखा गया है जबकि वाराणसी में 2022 तक टीबी मुक्त जनपद का लक्ष्य रखा गया है|
जनपद में अभी तक पांच चरण चलाये जा चुके हैं, जिसमें कुल 285 टीबी के मरीज खोजे गए| अभियान का पहला चरण अगस्त 2017 में चलाया गया था, जिसमें 1613 बलगम एकत्रित किये गए थे, जिसमें 43 टीबी के मरीज पाए गए थे| दूसरे चरण दिसम्बर 2017 में 2029 के बलगम एकत्रित कर 52 टीबी के मरीज खोजे गए थे| तीसरे चरण फरवरी 2018 में 2933 के बलगम एकत्रित कर 72 टीबी के मरीज खोजे गए थे| चौथे चरण जून 2018 में 1497 के बलगम एकत्रित कर 43 टीबी के मरीज खोजे गए थे| वहीँ पांचवें चरण सितम्बर 2018 में 1718 के बलगम एकत्रित कर 75 टीबी के मरीज खोजे गए थे|
जिला क्षयरोग अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि इस अभियान की सफलता हेतु जनपद में 4.21 लाख की जनसंख्या पर 150 टीमें गठित की गई हैं| यह अभियान जनपद के चयनित क्षेत्रों में चलाया जाना है, जिसमें 34 सुपरवाइजर को तैनात किया गया है| वहीँ प्रत्येक टीम में 3 सदस्य शामिल होंगेl यह अभियान जनपद के 15 ब्लॉक एवं नगर चोलापुर, दुर्गाकुंड, हरऊआ, काशीविद्यापीठ, पिंडरा, रामनगर, सेवापुरी, शिवपुर, सुन्दरपुर, अराज़ीलाइन, बड़ागांव, भेलूपुर, चौंकाघाट और चिरईगांव के चयनित क्षेत्रों में चलाया जायेगा|
उन्होंने लक्षण के बारे में बताते हुए कहा कि दो सप्ताह या उससे अधिक समय से लगातार खाँसी का आना, खाँसी के साथ बलगम का आना, बुखार आना (विशेष रूप से शाम को बढ़ने वाला), वजन का घटना, भूख कम लगना, सीने में दर्द, सोते समय पसीने आना, बलगम के साथ खून आना आदि इसके मुख्य लक्षण हैं| उन्होंने सभी लोगों से सहयोग से अपील की है कि वह भ्रमण कर रही टीम द्वारा घर के सभी सदस्यों की स्क्रीनिंग कराये, जिससे टीबी के मरीजों में निरंतर कमी लायी जा सके|

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