महेंद्र मिश्रा ब्यूरो उत्तर प्रदेश
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में हर दिन कानून व्यवस्था का अपराधी मखौल उड़ाते हैं। महिलाएं, बच्चियां असुरक्षित हैं। सर्राफ और दूसरे कारोबारी लुट रहे है। किसान, नौजवान बदहाल हैं। हत्या, लूट, अपहरण और बलात्कार पर अंकुश नहीं। अराजकता के चलते निवेशक किनाराकशीं कर रहे हैं। भाजपा सरकार में विकास ठप्प है। प्रदेश की भाजपा सरकार को इस सबकी कोई फिक्र नहीं। अपने विभाग सम्हालने के बजाय इन दिनों पूरी सरकार प्रयागराज में होने वाले अर्धकुम्भ का न्योता बांटने विभिन्न प्रदेशों की खाक छान रही है।
अर्द्धकुम्भ पर्व में लाखों श्रद्धालु स्वतः जुटते हैं। वहां वी.वी.आई.पी. या वी.आई.पी. जैसी कोई श्रेणी नहीं होती है। माननीय उच्च न्यायालय ने कहा है कि कुंभ मेला मानवता व भाईचारे को बढ़ाने वाला धार्मिक आयोजन है। मेले में सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं और कोई वीआईपी नहीं है। इसलिए सबसे पहले प्राथमिकता यह हो कि कुंभ के आयोजन में किसी भी तरह की कमी न रहे और सुरक्षा तथा सुविधा सुनिश्चित होनी चाहिए। अभी पिछले सप्ताह अखाड़ा परिषद के महंत नरेन्द्र गिरि महराज ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को कुम्भ में आने का निमंत्रण दिया था। गिरि महाराज का कहना है कि समाजवादी सरकार में सन् 2013 में कुंभ अपनी भव्यता को लेकर दुनिया में चर्चित रहा। तभी विदेशी अधिकारी कुंभ मैनेजमेंट की बारीकी जानने आए थे। कुम्भ पर्व संयमित और शांस्मरणीय है,अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्वकाल में सन् 2013 में प्रयाग में कुम्भ पर्व शानदार तरीके से सम्पन्न हुआ था। इसकी सुचारू व्यवस्था से विदेशी तक बहुत प्रभावित हुए थे और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने उस आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की थी। उन्होंने करोड़ों की भीड़ के एक स्थान पर एकत्रीकरण, उनकी सुख सुविधा के व्यापक विस्तार पर प्रशासन की सुचारू व्यवस्था, कानून व्यवस्था का प्रबंधन आदि के लिए अखिलेश यादव की दूरदर्शी सोच और नेतृत्व क्षमता का कुषल उदाहरण माना था।
स्मरणीय है, सन् 2013 का कुंभ पर्व 14 जनवरी से 22 मार्च तक शांतिपूर्ण
ढंग से उत्तर प्रदेश में सम्पन्न हुआ। इस आयोजन पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के
साउथ एशिया इंस्टीट्यूट ने 447 पृष्ठो की एक पुस्तक निकाली थी जिसमें इसकी
प्रारम्भिक तैयारियों से लेकर इसके समापन तक का विवरण संकलित है। अखिलेश यादव ने प्रयागराज स्थित पुराने किले को पर्यटन विभाग को सौंपने की
मांग की है। अभी इस किले की देख-रेख रक्षा मंत्रालय के अधीन है। इस किले
में स्थित अक्षयवट के दर्शनार्थ भी लोग आते हैं अतः इसके निकट फूडकोर्ट,
पाताल मंदिर का सौंदर्यीकरण, सरस्वती कूप का विकास, कमल के ऊपर सरस्वती
प्रतिमा का निर्माण, लेजर शो की व्यवस्था तथा सौंदर्यीकरण करके
तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है।

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