रिपोर्टर- पुनीत मिश्रा
सपा बसपा गठबंधन की घोषणा होते ही भाजपा बसपा पर अधिक हमलावर हो गई है
भाजपा ने मोर्चे पर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी को लगाया है जिनके
पिता पूर्व मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने जान की परवाह किए बिना स्टेट
गेस्ट हाउस कांड में मायावती की जान बचाई थी इस घटना के 3 साल बाद ही
ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या कर दी गई थी मेजर सुनील दत्त द्विवेदी ने कहा
कि उस समय मेरे पिता मायावती के भाई थे और मैं उनका भतीजा अब जब फिर सत्ता
की बात आई तो मायावती ने अखिलेश यादव को अपना भतीजा बना लिया है मतलब साफ
है कि मायावती को रिश्ते निभाना नहीं आता है अब अगर फिर ऐसा कांड दोहराया
जाता है तो कोई नेता ऐसे लोगों की जान बचाना नहीं चाहेगा क्योंकि मायावती
ने दुश्मन से हाथ मिलाकर एक शर्मनाक नजीर पेश की है
कहावत है कि
लोहा ही लोहे को काटता है ऐसे में जब सपा और बसपा के गठबंधन की इबारत लिखी
गई तो भाजपा में विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी को मोर्चे पर लगाया गया 2
जून 1995 के को हुए स्टेट गेस्ट हाउस कांड में मेजर सुनील दत्त द्विवेदी
के पिता ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने ही मौके पर पहुंचकर मायावती की जान बचाई थी
हम मेजर सुनील दत्त द्विवेदी के बयान का जिक्र करें तो इसके पहले जान लेते
हैं कि स्टेट गेस्ट हाउस कांड था क्या 1993 में सपा बसपा के गठबंधन से
सरकार बनी थी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे उस दौरान भी मायावती ने
मुलायम सिंह यादव के खिलाफ कई बयान दिए लेकिन मई के अंतिम सप्ताह में
मायावती सरकार से समर्थन वापसी के लिए सक्रिय हो गई सत्ता छीनने की खबर
मुलायम सिंह यादव के समर्थकों तक पहुंची तो उनके समर्थकों का गुस्सा फूट
पड़ा 2 जून 1995 को मायावती स्टेट गेस्ट हाउस में अपने विधायकों के साथ
बैठक कर रही थी तभी ढाई सौ से अधिक सपाइयों ने उस कमरे पर हिंसक हमला बोल
दिया था सपा कार्यकर्ता मायावती को निपटाना चाहते थे और इसके लिए गैस
सिलेंडर खोल दिए गए थे यह जानकारी जब गेस्ट हाउस के बगल में रह रहे पूर्व
मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी को लगी तो अकेले ही गेस्ट हाउस जा पहुंचे और
सपाइयों और मायावती के बीच दीवार बनकर खड़े हो गए खुद पर हमला होने के
बावजूद गेस्ट हाउस का दरवाजा तोड़कर मायावती को जीवित बचा कर निकाल लाए थे
इस घटना को ही स्टेट गेस्ट हाउस कांड कहा जाता है ब्रह्मदत्त द्विवेदी की
हत्या के बाद हुए उपचुनाव में मायावती उनकी पत्नी के पक्ष में सभा करने
फर्रूखाबाद आई थी भाजपा विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी ने कहा कि मायावती
ने उस पार्टी से गठबंधन किया है जिसके नेताओं ने उन्हें 1995 में जान से
मारने की कोशिश की थी उन्होंने कहा कि साल 1995 में जिस दौरान यह घटना हुई
उस समय मेरे पिता ने ही उनकी जान बचाई थी इस घटना के बाद उन्होंने मेरे
पिता को अपना भाई और मुझे भतीजा बताया था सुनील ने कहा कि इस घटना के 23
साल बाद अब उन्होंने समाजवादी पार्टी से गठबंधन कर लिया है और उन्हें
अखिलेश यादव के रूप में एक नया भतीजा भी मिल गया है अखिलेश कैसे मायावती के
भतीजे हो गए क्योंकि ना तो मायावती ने कभी मुलायम को अपना भाई माना और ना
मुलायम ने मायावती को अपनी बहन माना दोनों नेता सत्ता में आने पर एक दूसरे
को जेल में डालने का एलान करते रहे मायावती रिश्तो को निभाना नहीं जानती
हैं उन्होंने अटल जी की सरकार से विश्वासघात किया था जबकि उनकी पार्टी के
कार्यकर्ता ने ही उनकी जान बचाई थी
विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी ने कहा कि सपा बसपा का गठबंधन चुनावी गठबंधन ना होकर ठगबंधन है अवसरवादी गठबंधन तेल और पानी के मिश्रण जैसा ही है सपा और बसपा नेतृत्व ने अपने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर यह गठबंधन किया है क्योंकि दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के दिल में इतने गहरे जख्म हैं जिन्हें इस गठबंधन से मिटाया नहीं जा सकता जब बसपा सरकार बनी तब सपाइयों के खिलाफ दलित उत्पीड़न के मुकदमे लिखे जाते थे और जब सपा सरकार में आती थी तब बसपाइयों के खिलाफ फर्जी मुकदमें लिखे जाते थे उन्होंने कहा कि मायावती जी की जान ब्रह्मदत्त जी ने बचाई थी पर अब कोई नेता ऐसे लोगों की जान बचाना नहीं चाहेगा तो की मायावती ने उन लोगों से हाथ मिला लिया है उन्होंने उन पर जानलेवा हमला किया था
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