रिपोर्ट - अरविन्द शर्मा ब्यूरो
वहीं स्वच्छ भारत के लिए अरबों रुपए शौचालय में भी खर्च
कर रही है पर बावजूद उसके स्कूल के टीचरों की लापरवाही के चलते शिक्षा
व्यवस्था चौपट हो गई है वह शौचालय में ताला लटका हुआ है बच्चों के भविष्य
से खिलवाड़ कर रहे शिक्षकों की मनमानी के आगे बच्चों का भविष्य अंधकार में
जा रहा है और शिक्षक आंखें मूंदे बैठे हुए हैं अधिकारी भी ऐसे शिक्षकों पर
कोई कार्यवाही नहीं करता
रसूलाबाद
कोतवाली क्षेत्र के गंभीरा गांव में प्राथमिक विद्यालय गंभीरा के
हालात यह है कि कहने को तो यहां प्राथमिक विद्यालय जरूर बना है और उसमें
बच्चे भी आते हैं पर सरकार की तरफ से दिया जाने वाला मिड डे मील का खाना
स्कूल में पढ़ने वाले उन बच्चों को नहीं मिल पाता है और वह पढ़कर भूखे ही
घर चले जाते हैं वहीं अगर स्कूल में शौचालय की बात करेंं तो शौचालय तो है
पर उस शौचालय पर अध्यापकों ने ताला लगा रखा है और बच्चे मजबूरी में स्कूल
के बाहर ही शौचालय खुले में जाते हैं जो बच्चे स्कूल में पढ़ने आते भी हैं
वह अपनी बैठने की व्यवस्था खुद ही करते हैं और स्कूल की साफ सफाई भी वह
बच्चे स्वयं करते हैं यह कोई नया मामला नहीं है ऐसे ना जाने जिले में
कितने स्कूल हैं जो ऐसे लापरवाह अध्यापकों के मनमानी के शिकार हो रहे हैं
और बच्चोंं का भविष्य अंधकार में डाल रहे हैं |टीचरों को तो हर महीने सरकार मोटी तनख्वाह देती है इन नौनिहाल बच्चों
को पढ़ाने के लिए पर ऐसे न जाने कितनेेेे शिक्षक होंगे जिले में जो बच्चों
के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं आखिर कब ऐसे लापरवाह टीचरों पर
सरकार कोई कदम उठाएगी और लापरवाह टीचरों के खिलाफ कार्यवाही करेगी|
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