जिला संवादाता - अरविन्द शर्मा
मोबाइल टावरों से निकला रेडिएशन गौरैया की जान का
दुश्मन बना हुआ है ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी ऑफ प्रोटेक्शन वर्ड्स संस्था ने
इसे रेड लिस्ट में डाला है।वर्ष दो हजार दस से बीस मार्च को विश्व गौरैया
दिवस मनाया जा रहा है गौरैया चने और मटर की फसल में लगने वाले घोंघी कीट को
खाकर हमें फसल सुरक्षा देती है।इसकी लंबाई सोलह सेमी एवं वजन बत्तीस ग्राम
तक होता है। उक्त बात केन्द्रीय विद्यालय माती की अंतर्राष्ट्रीय स्वर्ण
पदक विजेता स्काउट की छात्रा शान्या ने रैली निकाले जाने से पूर्व रैली में
शामिल छात्रों से कही।
इस अवसर पर केंद्रीय विद्यालय माती के राज्य स्तरीय
ग्रेपलिंग स्वर्ण पदक विजेता स्काउट छात्र शिवम ने बताया कि गौरैया मानव
के साथ रहने वाला मित्र पक्षी है।आज हमारे घर बड़े हो गए और दिल छोटे हो गए
जिससे गौरैया के लिए पक्के मकानों में कोई निवास स्थान नहीं रह गया है और
इसके प्राकृतिक आवास तेजी से घटे हैं इसका शरीर धारा रेखित होता है एवं
हड्डियां खोखली होती है जिससे ये दो किलोमीटर दूर तक जाकर तेजी से अपना
भोजन तलाश लाती है तथा इसकी छब्बीस प्रजातियां पाई जाती हैं।आंध्र प्रदेश
में यह पक्षी मात्र बीस प्रतिशत ही बचा है और तिरुवनंतपुरम में वर्ष 2017
में मात्र उन्तीस की संख्या में पाया गया जो बेहद चिंता की बात है। जूते के
डब्बे ,चौड़े मुंह की प्लास्टिक बोतल, और घड़े में छेद करके वह दाना पानी
रख कर इस पक्षी की संख्या वर्धन किया जा सकता है।बाद में यह रैली अकबरपुर
रोड बॉम्बे से प्रारंभ होकर मंडी समित कबीर आश्रम होते हुए विकास मोटर्स के
पास समाप्त हुई रैली में राकेश पांडेय,अनिल यादव,रूपेन्द्र तिवारी अक्षय
आस्था सेंगर मुस्कान गौरव द्विवेदी अभिषेक शामिल थे।

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