रिपोर्ट - पुनीत मिश्रा
यह हौसला उन लोगो के लिए नज़ीर है जो समझते है की हाथ पैर मारने से ही
मुसीबततो के पहाड़ गिरते है जीवन की डगमगाती लौ में इसी हौसले ने जगमगाया
जिंदगानी का दीपक प्रकाश फैला तो ऐसी ललक जगी की बाधाएं और मुसीबते खुद व
खुद अपना रास्ता ढूढ़ने लगी दोनो हाथ नही एक पैर भी बेजान फिर भी हौसलो से
इतनी ऊँची उड़ान की लोग बस देखते रह जाये यह उड़ान उन लोगो के लिए भी सबक है
जो सोचते है की दिव्यांग कुछ कर नही सकते है हौसलो की यह शिवानी उस देवी की
तरह है जिसने असुरो का संहार किया
शिवानी ने बाधाओ का संहार किया
पीड़ाओं का दमन किया और मजबूत इरादों से आगे बढ़ चली है फतेहगढ़ के शांतिनगर
निवासी राजेश श्रीवास्तव के घर शिवानी का जन्म हुआ तो उसके दोनों हाथ नही
थे दाया पैर छोटा और टेढा भी शिशु अवस्था से शुरू खुद का शारीरिक संघर्ष
बाल्यावस्था में भी चलता रहा इस संघर्ष में ही जन्मा कुदरत की दी हुई इस
पीर से लड़ने का जज्बा वह सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ने जाने लगी शारीरिक
दृस्टि से सामान्य रूप में बस बांया पेअर ही था सो इसी पेअर की उंगली और
अगूठे से कलम थामने लगी कापियों पर कलम चली तो मानो की सरस्वती खुद व खुद
विराजमान हो गई
बच्चो का जीवन सवारने की तमन्ना:-
विज्ञान से स्नातक के बाद वह अब बीएड की पढ़ाई कर रही शिवानी बताती है की विशेष बच्चो का जीवन सँवारे यही लक्ष्य उन्हें शिक्षण की ओर बढ़ा रहा है परीक्षा के दौरान जी तोड़ मेहनत के साथ वह लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रही है मोहल्ले के बच्चो को पढ़ा भी रही है
बच्चो का जीवन सवारने की तमन्ना:-
विज्ञान से स्नातक के बाद वह अब बीएड की पढ़ाई कर रही शिवानी बताती है की विशेष बच्चो का जीवन सँवारे यही लक्ष्य उन्हें शिक्षण की ओर बढ़ा रहा है परीक्षा के दौरान जी तोड़ मेहनत के साथ वह लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रही है मोहल्ले के बच्चो को पढ़ा भी रही है
फिर से हुआ जिंदगी का नया सवेरा:-
शारीरिक दिव्यांगता से बचपन से लड़ती आ रही शिवानी ने इस बार फिर जिंदगी का नया सवेरा देखा शिवानी के पिता राजेश श्रीवस्तब बताते है की बीएड की पढ़ाई के दौरान बेटी को काफी दिक्कत आई लेकिन उसने हार नही मानी
अक्षमता के बाद भी आत्मनिर्भर शिवानी:-
टेढ़े और छोटे पैर की सहायता से शिवानी बायें पैर में कप फांसती है और वह मुह तक कप ले जाकर चाय पीती है इसी पैर से पानी का मग फसाकर नहाती भी है इसी से खाना और कंघी की मदद से बाल सॅवारती है घर में वह अकेली रहती तो वह घर के दरवाजों की कुंडी कंधे के सहारे से लगाती और खोल देती है
सहायता के नाम पर सिर्फ वजीफा तक नही:-
सिस्टम का यह गंदा चेहरा की प्रोत्साहन व सहायता के नाम पर शिवानी की झोली खाली ही रही प्राईमरी से बीएड तक की पढ़ाई में कभी वजीफा तक नही मिला
टेढ़े और छोटे पैर की सहायता से शिवानी बायें पैर में कप फांसती है और वह मुह तक कप ले जाकर चाय पीती है इसी पैर से पानी का मग फसाकर नहाती भी है इसी से खाना और कंघी की मदद से बाल सॅवारती है घर में वह अकेली रहती तो वह घर के दरवाजों की कुंडी कंधे के सहारे से लगाती और खोल देती है
सहायता के नाम पर सिर्फ वजीफा तक नही:-
सिस्टम का यह गंदा चेहरा की प्रोत्साहन व सहायता के नाम पर शिवानी की झोली खाली ही रही प्राईमरी से बीएड तक की पढ़ाई में कभी वजीफा तक नही मिला
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