रिपोर्ट - रीतू श्रीवास्तव
इस धरती पर जहाँ लोगो मे इंसानियत नाम की चीज नही है,वही लम्भुआ कोतवाली
में आरछी के पद पर तैनात वीरेन्द्र सिंह पटेल,नाम का यह व्यक्ति अपने आप मे
कुछ अलग दिखता है,जहाँ जानवर किसानों की खेती को साफ करते नजर आते
है,किसान उनको मारते पीटते है,वही यह आरछी इन बेजुबान जानवरो की दिल से
सेवा करता है,अभी हाल ही में एक सांड किसी,वाहन की चपेट में आ गया था,और उस
चोटहिल अनबोलता जानवर को कोतवाली के सामने कोई छोड़ दिया,वह जानवर चलने में
असमर्थ होने के नाते अपना पेट नही भर पा रहा था,इसी बीच आरछी वीरेंद्र
सिंह पटेल की निगाह पड़ी तब से आज तक उस अनबोलता जानवर की खाने के लिए चारा
पर पानी की व्यवस्था करते रहे पता भगवान को क्या मंजूर था,सांड को चार माह
बाद मृत्यु हो गई,इस पर भी आरछी वीरेंद्र अपने सहयोगी आरछीयो के साथ मिल कर
जेसीवी बुला कर गड्ढा बनवाकर उसमे नामक डलवा कर उसे गड्ढे में दफनवा
दिया,इसमे थाने में तैनात पवन के साथ साथ और आरछी,सिपाहियो का भरपूर सहयोग
वीरेंद्र को मिला,बात यही नही खत्म होती अपने निजी वेतन से पैसा खर्च करके
ऐसे अनबोलता पशुओं पंछियो के लिए पानी पीने की एक बड़ी सी टंकी बनवाकर उसमे
हर दिन पानी भरते है,इसका नजारा देखने हो तो थाने के बगल किसी भी छड़ इस
टंकी पर 10 मिनट का समय दे कर खड़े होकर देखिए,यहां जानवरो की लाइन लगती
है,पानी पीने के लिए,वीरेंद्र सिंह पटेल ने बताया कि हमे हमारे साथियो के
साथ कोतवाली प्रभारी लम्भुआ श्याम सुंदर पाण्डेय जी का भरपूर सहयोग और ऊपर
वाले का आशीर्वाद मिला और इस नेक कार्य मे हमे सफलता मिलती है।

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