रिपोर्ट - रीतू श्रीवास्तव
मोस्ट कल्याण संस्थान के निदेशक शिक्षक श्यामलाल निषाद 'गुरुजी'
ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि चुनाव के दौरान, कुलीनतंत्रीय जातीय कार्यो
के विभाजन की अभिव्यक्ति लोकतंत्र के विरुद्ध है। लोकतंत्र में सम्पूर्ण
समाज के सदस्यों की समानता समाहित है, समानरूप से अगड़ों-पिछड़ों को राजा
बनाने-बनने का अधिकार है। लोकतंत्र में मतदान वह अस्त्र है जिसके द्वारा
मतदाता अपने हितों की रक्षा के लिए शासन में हस्तक्षेप करता है तथा शासन
पर नियंत्रण व जनहित में कार्य करने के लिए बाध्य करता है किन्तु जागरूक
मतदाता ही इस अस्त्र का विवेकपूर्ण ढंग से प्रयोग करके समस्त समस्याओं का
निराकरण कर सकता है,अविवेकपूर्ण मताधिकार के प्रयोग के कारण ही 'कार्लाइन'
ने लोकतंत्र को मूर्खो का शासन कहा है। श्री निषाद ने मोस्ट समाज से आग्रह
किया कि व्यक्तिगत स्वार्थ, वोट के ठेकेदारों व विचौलियों को दरकिनार कर
अपने अधिकारों की शक्ति का प्रयोग सामूहिक रूप से पिछड़ों की दशा सुधारने के
लिए करना चाहिए।
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