तहकीकात न्यूज़ डेस्क लखनऊ
आज भारत के नरेंद्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री पद का शपथ लेने जा रहे है शपथ से पहले किस प्रकार से शपथ दिलायी जाती आइये हम सब मिलकर जाने
शपथ से पहले की प्रक्रियाप्रधानमंत्री शपथ लेने से पहले अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों के नामों की सूची राष्ट्रपति को सौंपते हैं। इसी आधार पर संभावित मंत्रियों को शपथ ग्रहण के लिए आमंत्रित किया जाता है।
राष्ट्रपति दिलाते हैं शपथ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं। राष्ट्रपति नए प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को भी शपथ दिलाते हैं। जबकि राज्यपाल राज्य में मुख्यमंत्री और मंत्रियों को।
अंत में राज्यमंत्री प्रधानमंत्री के बाद मंत्रियों को शपथ दिलाई जाती है। इसमें सबसे पहले कैबिनेट, उसके बाद स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों और अंत में राज्यमंत्रियों को शपथ दिलाई जाती है।
परिपत्र पर हस्ताक्षर पद और गोपनीयता की शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री और कैबिनेट/राज्यमंत्री एक संवैधानिक परिपत्र पर दस्तखत करते हैं। यही देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का संवैधानिक दस्तावेज होता है, जो हमेशा सुरक्षित रहता है।
विभाग का बंटवारा प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री शपथ लेने के बाद कैबिनेट और राज्यमंत्रियों में विभाग का बंटवारा करते हैं। इसके बाद संबंधित मंत्री विभाग का विधिवत पदभार ग्रहण करते हैं। काम शुरू करते हैं।
1952 से शुरू हुई प्रक्रिया जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत 13 मई 1952 को रष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने नेहरू को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई थी।
2014 का रिकॉर्ड टूटेगा 2014 में नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण में शार्क देशों के नेताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान करीब 4000 मेहनमान शपथ ग्रहण में शामिल हुए थे। गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में अब तक का सबसे बड़ा आयोजन होगा, जिसमें करीब 6000 मेहमान शामिल होंगे।
पद की शपथ का प्रारूप (केंद्रीय मंत्रियों के लिए)
मैं...., ईश्वर की शपथ लेता हूं/लेती हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा/रखूंगी। (संविधान का सोलहवां संशोधन) अधिनियम, 1963 की धारा 5 द्वारा अंतःस्थापित।)
मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूंगा/रखूंगी। मैं संघ के मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करूंगा/करूंगी तथा मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करूंगा/करूंगी।
गोपनीयता की शपथ का प्रारूप(केंद्रीय मंत्रियों के लिए)
'मैं....ईश्वर की शपथ लेता/लेती हूं कि जो विषय संघ के मंत्री के रूप में मेरे विचार के लिए लाया जाएगा अथवा मुझे ज्ञात होगा, उसे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को, तब के सिवाय जबकि ऐसे मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों के सम्यक् निर्वहन के लिए ऐसा करना अपेक्षित हो, मैं प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से संसूचित या प्रकट नहीं करूंगा।'
(संविधान का सोलहवां संशोधन अधिनियम, 1963 की धारा 5 द्वारा प्रारूप 3 के स्थान पर प्रतिस्थापित।)
संसद सदस्य द्वारा ली जाने वाली शपथ का प्रारूप
'मैं....जो राज्यसभा (या लोकसभा) में स्थान भरने के लिए अभ्यर्थी के रूप में निर्वाचित या नामनिर्देशित हुआ हूं ईश्वर की शपथ लेता हूं/सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा। मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूंगा तथा जिस पद को मैं ग्रहण करने वाला हूं उसके कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करूंगा।
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