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Sunday, 30 June 2019

कानपुर देहात - आज़ादी के 72 साल बाद भी गांव में नही पहुंची बिजली,पलायन को मजबूर ग्रामीण

जिला संवादाता अरविन्द शर्मा

 आजादी के बाद से देश में कई सरकारे आयी और गयी और उनके द्वारा लगातार विकास के कार्य कराए जाने के दावे किए गए लेकिन धरातल पर विकास नही पहुंचा इसके बाद देश में मोदी की सरकार आयी हर गांव हर शहर को विकास की धारा से जोड़ने की बात कही गयी लोगो को उम्मीद की आश जगी लेकिन इनके द्वारा भी विकास को लेकर किये गए वादे खोखले साबित हुए। विकास सिर्फ कागजो तक ही सीमित रह गया है धरातल में लोग आज भी आदिवासी जिंदगी जीने को मजबूर है लोग जमीन से आसमान में पहुँच रहे है लेकिन कानपुर देहात के बहुत से ऐसे गाँव है जहाँ के लोग बद्दतर जिंदगी में जीने को मजबूर हो रहे है आजादी के 72 साल बीत गए लेकिन जनपद में आज भी बहुत से ऐसे गांव हैं जहां पर आज भी बिजली नही है लोग टिम टिमाते बल्ब को अपनी आंखों से नहीं देख पाए। बिजली की विकराल समस्या के चलते ग्रामीण अब गाँव से पलायन कर शहर में रहने को मजबूर हो रहे हैं। बावजूद इसके जिले के प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि अनजान बने हुए है। गांव में पढ़ने बच्चे दिये या मोमबत्ती के सहारे पढ़ाई करते हैआज हम बात कर रहे है रसूलाबाद तहसील क्षेत्र के भौथरी गाँव की जहाँ देश की आजादी से लेकर अब तक बिजली की रोशनी से रोशन नही हो सका है गांव विधुतीकरण के लिए चयनित हो गया था लेकिन अफसरों की लापरवाही  से आज तक गांव में बिजली नही पहुँच सकी बल्कि बिजली के लिये खम्भे बहुत पहले गाड़कर ही सीमित कर दिए गए लेकिन गाँव में अभी तक बिजली न पहुंचने से ग्रामीणों में नाराजगी है। 
 

 
जनपद कानपुर देहात मुख्यायल से महज 24 किमी दूर रसूलाबाद विकास खण्ड क्षेत्र के भौथरी गांव में अभी तक विद्युतीकरण नहीं हो सका है। गांव में 1 वर्ष पहले ही बिजली का कार्य शुरू हुआ लेकिन 1 वर्ष से अभी तक गांव में विद्युतीकरण का कोई कार्य नहीं हुआ। गांव में जगह जगह खंभे पड़े हैं और ट्रांसफार्मर मुंह चिढ़ा रहा है। गांव के लोग भीषण गर्मी में परेशान है। ऐसे में बिजली से उम्मीद होती है कि बिजली होगी तो पंखा चलेगा और गर्मी से राहत मिलेगी लेकिन वहां ऐसा कुछ नहीं दिखाई देता। भौथरी कपराहट के ग्रामीण कल्लू ने बताया कि बिजली न होने से गांव के बच्चे पढ़ाई नही कर पा रहे है। अगर पढ़ाई कर भी करते है तो दीपक, लालटेन का सहारा ले रहे है। दीपक से निककने वाला धुँआ भी बच्चों के आंखों के लिए घातक साबित हो रहा है। गांव में ग्रमीणों को दिखाने के लिए दो वर्ष पहले से ही खम्बे गाड़ दिये गए थे। लेकिन वो ख़ंम्बे अभी भी शो पीस बने खड़े हुए है। जबकि इस गांव के पड़ोस के गांव में बिजली बराबर दौड़ रही है। ग्रामीणों की माने तो इस गांव की बिजली कागजो में तो चल रही है लेकिन हकीकत कुछ और है। गांव से हाईटेंशन के तारों को निकाला गया लेकिन घरों तक बिजली पहुंचाने में अधिकारियों ने दिलचश्पी नही दिखाई।  चुनाव नजदीक आते ही नेता गांव आकर बहुत से वादे किए लेकिन जीतने के बाद वो गांव की समस्या को भूल जाते है। ग्रामीणों से कई बार वादा किया गया लेकिन अभी तक इसे हकीकत में नहीं बदला जा सका है। विधानसभा हो या लोकसभा चुनाव वोट लेने के लिए गांव जनप्रतिनिधि आते हैं। मतदान होने के बाद कोई भी जनप्रतिनिधि वापस नजर नहीं आता है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। गाँव के ग्रामीणों ने बताया कि समस्या को लेकर कई बार अफसरों से भी शिकायत दर्ज कराई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।
 
 
वही ग्रामीणों ने बताया कि गांव में बिजली न होने से लोग अपनी बेटियों का रिश्ता करने में कतराते हैं। अगर शादी होती भी है तो शादी में  इलेक्ट्रॉनिक उपकरण देने से गुरेज करते हैं। क्योंकि गांव में बिजली ही नहीं है तो वह कहते हैं कि इलेक्ट्रानिक उपकरण फ्रीज,कूलर,टीवी लेकर क्या करोगे। वही जिसको शादी में यदि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिल ही जाता है तो वह घर में शोपीस बना रह जाता है। वही ग्रामीणों ने बताया कि टेलीविजन और अखबारों में देश के प्रधानमंत्री के विकास को लेकर देश के समूचे क्षेत्रों में विद्युतीकरण के विज्ञापन देखते हैं। लेकिन उसका असर भौथरी गाँव में देखने को नहीं मिलता। विद्युत विभाग के आला अधिकारियों की उपेक्षा के चलते हमारा गांव आज भी गुलामी जैसी जिंदगी जी रहा है। जहां पर मूलभूत सुविधाएं नहीं है और न ही ग्राम पंचायत स्तर पर कोई विकास कार्य हुए। जब गांव में किसी भी प्रकार का विद्युतीकरण का कार्य नहीं हुआ और गांव वाले आज भी बिजली के लिए तरस रहे हैं तो ऐसे में ग्राम पंचायत स्तर से लेकर सांसद निधि तक गांव में सोलर लाइट लगनी चाहिए ताकि प्रकाश की समुचित व्यवस्था हो सके। वह प्रयास भी नहीं किए गए। गांव में अंधेरे में ग्रामीण भय व्याप्त जिंदगी व्यतीत कर रहे है। जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।गांव में बिजली न होने के चलते मोबाइल फोन इत्यादि कैसे चार्ज करें । बिना बिजली के जीवन कैसे संभव हो सकता है और कैसे बेहतर शिक्षा बच्चों की हो सकती है। ग्रामीण मजबूर होकर गाँव को छोड़कर शहर में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैवही जनपद के मुख्य विकास अधिकारी जोगिंदर सिंह ने बताया कि मुझे इस प्रकार की कोई जानकारी नही है अगर ऐसा है तो 2 दिन में व्यवस्था ठीक कराकर बिजली शुरू करा दी जायेगी

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