ब्यूरो कानपुर रवि गुप्ता
अंधेर
नगरी चौपट राजा की कहावत शायद आज शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था के लिए
फिट बैठती है। क्योंकि बदहाल यातायात व्यवस्था के लिए जितना शहर का सरकारी
विभाग जिम्मेदार है। उतना ही शहर का नागरिक भी जिम्मेदार है। हम नहीं
सुधरेंगे की सोच के लिए शहर की जनता भी जिम्मेदार हैं। एक तरफ सरकार तो
अपना काम करती है। यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पार्किंग का
निर्माण करवाती है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ आम आदमी अपने थोड़े से लाभ के लिए
सरकार का बड़ा नुकसान करने में भी नहीं सोचता है। बिरहाना रोड, माल रोड,
मेस्टन रोड, लाटूश रोड, नवीन मार्केट, परेड पर देखा जा सकता है। कि जिस
प्रकार से सड़कों के किनारे वाहनों को खड़ा करके आम आदमी चल देता है। जैसे
कि सड़क उसकी जागीर हो। जिसके कारण जाम लगता है। तो वही बिरहाना रोड पर
व्यापारियों ने कोड में खाज का काम किया है। जिस प्रकार से दुकानों के बाहर
वाहनों की लंबी लंबी लाइन लगी रहती है जिसके कारण जाम लगता है। लेकिन
व्यापारियों को नहीं दिखता है कि आम आदमी कितना परेशान हो रहा हैं।
इस जाम
के कारण, सेन डिग्री कॉलेज की टीचर अपनी गाड़ियों को कॉलेज के बाहर फुटपाथ
पर और सड़क के किनारे खड़ी कर देती है। जिससे जाम कि स्थिति उत्पन्न होती
है। और सबसे बड़ी बात यह है कि चंद कदमों की दूरी पर मल्टीलेबिल कार
पार्किंग बनी है। लेकिन अपने थोड़े से स्वार्थ के कारण फुटपाथ को भी नहीं
छोड़ा पैदल चलने वालों के लिए। और सबसे बड़ा दुर्भाग्य तो यह देखिए जो
बच्चों को अच्छे भविष्य के लिए ज्ञान देते हैं। कि क्या अच्छा क्या बुरा की
बात करते हैं। जब वही गलत करें तो फिर उन बच्चों को क्या कहां जाए जब हर
व्यक्ति सड़क और फुटपाथ पर ही कब्जा कर लेगा तो वाहन क्या आसमान में
चलेंगे। ऐसे लोगों की जांच होनी चाहिए जो सड़कों पर पार्किंग किए हुए हैं।
जिस विभाग के अधिकारियों ने आदेश दिया है। उसकी जांच होनी चाहिए। और बची
कूची कसर नगर निगम पूरी कर देता है। सड़कों के किनारे स्टैंड का ठेका देकर
अब इसके लिए दोषी किसे कहा जाए। बर्बाद गुलिस्तां करने को, सिर्फ एक उल्लू
काफी था। हर शाख पे उल्लू बैठा है। अंजाम गुलिस्तां क्या होगा।
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