जिला सवांदाता - अरविन्द शर्मा
हिंदू धर्म में होने वाले शादी विवाह के कार्यक्रमों में कुएं का
बड़ा ही योगदान माना जाता है। शादी विवाह के दौरान वैवाहिक जोड़ा कुएं पर
पूजन के लिए जाते हैं, क्योंकि कुएं को ईश्वरीय स्वरूप माना जाता है। इस
परंपरा को जीवंत रखने के लिए कानपुर देहात के अकबरपुर नगर में एक और अनोखी
परम्परा की शुरुवात की गई। इसके अंतर्गत अकबरपुर के रामगंज के राजपूत
मोहल्ले में बने जर्जर कुएं के जीर्णोद्धार के बाद उस कुएं के पूजन के लिए
एक बुजुर्ग दंपति ने रस्मो रिवाज से पुनः विवाह कर रस्म अदायगी की। जिससे
अब किसी भी विवाह शादी पर कुएं के पूजन का कार्यक्रम किया जा सकेगा। दरअसल
इस कार्य के किये मोहल्ले के रामलाल व सियादुलारी बुजुर्ग दंपति को दूल्हा
दुल्हन के रूप में सजाया गया।
विधि विधान से बुजुर्ग दम्पति का विवाह संपन्न
इस
विवाह में वर वधू दोनों पक्ष के लोग सम्मिलित हुए और आचार्य कल्लू पंडित
ने विधि विधान से कुंआ पूजन के साथ विवाह संपन्न कराया। कुंआ पूजन कर शुरू
की गई इस अनोखी परंपरा के कार्यक्रम में सैकड़ों की तादात में लोग शरीक हुए।
विवाह के अनुरूप सियादुलारी व रामलाल ने एक दूसरे के वरमाला डालकर विवाह
की रस्म भी पूरी की। इसके बाद लोगों ने पुष्पों की वर्षा कर शादी की
बधाइयां भी दी। पूरे कार्यक्रम में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में उत्साह
दिखाया। सभी लोग मस्ती में झूम रहे थे और लोगों में उत्साह दिख रहा था।
विवाह कार्यक्रम की रस्म के बाद इस अनोखी परम्परा में शरीक हुए सभी लोगों
ने बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।
लोगों ने बुर्जुग दम्पति के विवाह का कारण बताया
राजपूत
मोहल्ले के लोगों ने बताया कि कुंआ का जीर्णोद्धार कराया गया था लेकिन
पूजन न होने से शादी विवाह में कुएं की रस्म के किये लोगों को दूसरे कुओं
पर जाना पड़ता था। इसलिए इस नई परंपरा की शुरूवात कर कुएं का पूजन हो गया
है। अब इस कुएं को शादी विवाह में पूजन व बारात में अर्घ्य देने के लिए
प्रयोग किया जा सकेगा और कुंआ शादी विवाह की रस्मों में गवाह बनेगा। वहीं
रामलाल से पूँछे जाने पर उन्होंने कहा कि समाज की खुशी और परंपरा को जीवंत
रखने के लिए ये रस्म अदायगी हुई। जिस कार्य मे सभी को खुशी मिलती है, उसमें
हम भी खुश हैं।
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