रिपोर्ट - पुनीत मिश्रा
एक ओर जब भाजपा सत्ता में
आयी थी तब लोगो को उम्मीद जगी थी की हम सुरक्षित है हमारा जीवन सुरक्षित है
लेकिन फर्रुखाबाद से आयी ये तस्वीरे कुछ उल्टा ही बया कर रही है तस्वीरे
चीख चीख कर कह रही है की सरकार के वादे झूठे है जिस तरह से आम आदमी को
पिछली सरकारों में छला गया ठीक उसी तरह के हालत फर्रुखाबाद के इस परिवार के
बुजुर्ग व्यक्ति की है आज यह परिवार दूसरी जगह रहने को मजबूर है फर्रुखाबाद के कम्पिल थाना छेत्र के गांव इखलाहरा में बसा झम्मम्बन लाल का परिवार
परिवार आज अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है जिस तरह से उत्तर प्रदेश में सी
ऍम योगी गुंडा राज और माफियाओ का खात्मा करना चाहते है ठीक इसके उलट तसेरे
कुछ और ही कह रही है गुंडाराज की बात तो दूर रही यहाँ खुलेआम आँख से अंधे
इस व्यक्ति की जमीन पर कुछ दबंगो ने कब्ज़ा कर लिया जिसके बाद दोनों आँखों
से अंधे झम्मम्बन लाल फर्रुखाबाद डी ऍम मोनिका रानी की चौखट पर इन्साफ की
गुहार लगाने पहुंचे लकिन झम्मम्बन लाल को वह भी कागजी कार्यवाही का भरोसा
देकर सरकारी थानों और ऑफिस के चक्कर कटवाने के लिए भेज दिया गया थक हार कर
आज झम्मम्बन लाल ने अपने दर्द की दाशता मीडिया के सामने बया की किस तरह के
गांव के ही कुछ दबंग झम्मम्बन लाल की जगह पर कब्ज़ा कर रहे है और प्रशाशन
हाथ पर हाथ रखकर बैठा हुआ है
कम्पिल
थाना छेत्र के गांव इखलाहरा में बसा झम्मम्बन लाल का परिवार बेहद ही गरीब
है रहने के लिए ना तो पक्का मकान है और ना ही सही सलामत जमीन गांव के
दबंगो ने झम्मम्बन लाल की जगह पर कब्ज़ा करके प्रशाशन को भी खुली चुनौती दे
रहे है चुनावी वादों के समय मंच से चीख चीख कर माफियाराज और गुंडाराज ख़त्म
करने वाले नेता कहा है जिस तरह से दबंग आज भी गरीबो की जगह पर कब्जे कर
रहे है वो प्रशाशन को कुली चुनौती पेश कर रहे है सरकार
के वादों और फटकार लगने के बाद भी फर्रुखाबाद के अफसर नौर नौकरसाह अधिकारी
कर्मचारी अपने भ्रस्ट तंत्र से बहार आने को कटाई तैयार नहीं है जिस तरह से
जमीनों से कब्जे को लेकर फर्रुखाबाद में गुंडई हो रही है उसको देखकर लगता
है की फर्रुखाबाद में जिला प्रशाशन का नामोनिशान ख़त्म हो गया है फर्रुखाबाद
डी ऍम मोनिका रानी से कए बार जमीनों से कब्जो को लेकर शिकायत की गयी लकिन
अफसरशाही में जीने वाली ये अधिकारी को गरीबो को सुनने और उनकी समस्या हल
करने का समय इनके पास क़तई नहीं है झम्मम्बन लाल डी.ऍम. मोनिका रानी की
चौखट पर हाजिरी देने के बाद भी उनको न्याय नहीं मिल सका है थानों और सरकारी
ऑफिसो के चक्कर लगाने के बाद झम्मम्बन लाल की करीब डेढ़ बीघा जमीन गांव के
दबगों के कब्जे से मुक्त नहीं हो सकी है न्याय की आस में भटकता आँखों से
अंधे झम्मम्बन लाल को आखिर कब न्याय मिलेगा ये सब भगवान भरोसे ही रह गया
है
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