रिपोर्ट - मोबीन मन्सुरी
मामला कन्नौज जिला अस्पताल का है जहां परिजनों को खुद ही मेहनत और मशक्कत
करके अपने परिजन को अस्पताल में लेकर जाना पड़ता है क्योंकि यहां के वार्ड
बॉय अपनी ड्यूटी को सही से नहीं निभाते वार्ड बॉय केवल ऐसी की हवा खाने के
लिए ही आते हैं ताजा मामला अस्पताल परिसर का है जहां मरीज को स्ट्रेचर ना
मिलने की वजह से परिजनों ने खुद ही मरीज को अस्पताल के अंदर ले जाने का
जिम्मा उठाया उन्होंने मरीज को साइकिल पर बैठाकर अस्पताल के अंदर इलाज
कराने के लिए अंदर बने एक्स-रे रूम तक साइकिल पर मरीज को बैठाकर पहुंच गए
यह पूरा वाक्य हमारे कैमरे में कैद हो गया जिसको लेकर के जिला अस्पताल
प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है अस्पताल प्रशासन की ओर से खबर को रोके जाने
का दबाव बनाया जा रहा है हमारे साथी पत्रकार से कहा गया है कि इस खबर को
रोक दिया जाए।यह कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले भी ऐसे कई मामले
सामने आए जिसमें परिजनों के द्वारा मरीज को खुद ही सहारा दिया जाता है
वार्ड बॉय की आवश्यकता होने पर वार्ड बॉय बाहर नहीं मिलता यह फैमिलीज को
परिजन के द्वारा खुद ही गोद में उठाकर या स्ट्रेचर पर बैठाकर इलाज के लिए
अस्पताल के अंदर लाया जाता है।
एक बार तो मरीज को अस्पताल लाने के लिए
परिजनों ने ठेलिया का प्रयोग किया किसी तरीके से परिजन ठेलिया से मरीज को
लेकर अस्पताल पहुंचे लेकिन वहां पर उसका सफल इलाज ना हो पाने के कारण
परिजनों में आक्रोष आया और परिजन उस को अस्पताल से घर वापस लिया है जिसके 2
दिन बाद मरीज की मृत्यु हो गई परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज ना करने
का आरोप भी लगाए थे।जिला अस्पताल प्रशासन लगातार अपना गैर
जिम्मेदाराना रवैया अपनाए हुए हैं अगर इसी तरह चलता रहा तो 1 दिन जिला
अस्पताल में कोई बड़ी घटना होने पर किस की जवाबदेही होगी।जब इस
पूरे मामले पर सीएमएस यूसी चतुर्वेदी से पूछा गया तो उन्होंने कहां की वह
हमारे स्टाफ का ही स्वीपर था जो मरीज को साइकिल पर बैठा कर ले गया है ऐसा
नहीं करना चाहिए था यह गलत है, इस पूरे वाक्य से साफ होता है कि अस्पताल
में स्टाफ को अगर सुविधा मुहैया नहीं हो पा रही है तो आम मरीज को सुविधा
कैसे प्राप्त होगी जिला अस्पताल सुविधाओं के मामले में सफेद हाथी बना हुआ
है जहां सुविधाएं तो हैं लेकिन उन को क्रियान्वित करने का कोई तरीका नहीं
है।
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