रिपोर्ट - पुनीत मिश्रा
इन
विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक लेट लतीफ आकर प्राथमिक शिक्षा की जड़ों में
मट्ठा डालने का काम कर रहे है। सरकार और शिक्षा विभाग जिले में शिक्षा के
स्तर और स्कूलों में बच्चों का दाखिला बढ़ाने के लिए प्रयासरत है, लेकिन
सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं न होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को
सरकारी स्कूलों में डालने में संकोच कर रहे हैं। जिलों में अध्यापकों की
कमी है। जिस कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्कूलों में
अध्यापकों की कमी को दूर करने के लिए अभिभावक कई बार प्रशासन एवं शिक्षा
विभाग के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके है, लेकिन इसके बाद भी अध्यापकों की कमी
को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग गंभीर नहीं है। नतीजा है यह कि सरकारी
स्कूलों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय है। बानगी
के तौर पर यदि जिले की तहसील अमृतपुर को ही ले लिया जाए तो यहां शायद ही
किसी स्कूल में 9 बजे से पहले अध्यापक पहुंच रहे हों। एबीआरसी शिक्षकों के
इस रबैया से खुद परेशान हैं। शिक्षकों की मनमानी के चलते परिषदीय स्कूलों
में पड़ रहे बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने की बात यहां दिवा स्वप्न साबित
हो रही है। प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में शिक्षकों के इस कारनामे अमृतपुर
क्षेत्र के स्कूलों की स्थिति मौके पर जाकर देखी। तो पाया कि कहीं शिक्षक
गायब तो कहीं प्रधानाध्यापक का पता नहीं है। जब यह टीम प्राथमिक विद्यालय
अमैया पुर पहुचीं तो वहां एक भी शिक्षक मौजूद नहीं मिला।
यहां
मौजूद एनपीआरसी ओम नारायण मिश्रा ने बताया कि इस विद्यालय में 6 शिक्षक
तैनात हैं। 8.40बजे तक एक भी शिक्षक यहां नहीं पहुंचा है। श्री मिश्रा ने
बताया कि यहां लेट लतीफ आना शिक्षकों की आदत में सुमार हो गया है। पूर्व
माध्यमिक विद्यालय गुडेरा में 9 बजे तक एक भी शिक्षक मौजूद नहीं मिला ।इस
विद्यालय के बच्चे खेलते मिले। मौजूदा ग्राम प्रधान पति सुधीर कुमार वर्मा
से जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यहां 9 बजे से पहले कोई नही आ रहा है।
नाम मात्र के लिए यहां स्कूल खोला जाता है। उन्होंने कहा कि पूरी तहसील के
कमोबेश यही।हाल है। प्राथमिक विद्यालय हीरा नगला डबरी में 9.10 तक प्रधान
अध्यापक पहुंचे। जब इस विद्यालय में एक भी सहायक अध्यापक मौजूद नहीं मिला।
इसी तरह पूरे तहसील क्षेत्र के विद्यालयों के अध्यापक मनमाने समय पर पहुंच
कर बच्चों का भविष्य चौपट कर रहे हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राम सिंह
इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे है। उनकी इस कारगुजारी के चलते अमृतपुर
क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की गाड़ी पूरी तरह से पटरी से उतर गई है। इन
विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।गांव
वालों का कहना है कि वह कई वार इस सम्बंध में शिकायत कर चुके हैं। लेकिन
उनकी शिकायत को नक्कार खाने में तूती की आबाज की तरह दवा दिया जाता है। कोई
कार्यवाही न होने पर इस क्षेत्र के लोग हैरान होकर बैठ गए हैं।उनका कहना
है कि गांव और गरीब की सुनने वाला कोई नही है। न जाने कितनी सरकारें आईं और
चलीं गईं।
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