यानी अफगानिस्तान मे एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी प्रधानमंत्री बनेगा, जो बुर्का नहीं पहनने पर महिलाओं को कोड़े मारने की सज़ा देता है। सिराज़ुद्दीन हक्कानी जैसा आतंकवादी, जो आत्मघाती तैयार करता है, वो गृह मंत्री बनेगा। दुनिया के साथ इससे बड़ा और भद्दा मज़ाक़ और क्या हो सकता है।
तालिबान की सरकार बनाने वाले इन आतंकवादियों के चिठ्ठा की जानकारी होने पर आप हैरान रह जाएंगे। प्रधानमंत्री बनने वाले आतंकवादी का पूरा नाम मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद है।
इसका परिचय ये है कि ये तालिबान के संस्थापकों में से एक है. इसे इस्लाम धर्म का विद्वान माना जाता है और ये शरिया क़ानून का कट्टर समर्थक है. ये बम धमाकों से जेहाद फैलाने की ट्रेनिंग भी दे चुका है।
सच्चाई पर गौर करने के बाद बात करें तो ये तालिबान की पहली सरकार में काम कर चुका है। इसके पास अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी होने का अनुभव है। ये संयुक्त राष्ट्र की घोषित आतंकवादियों की सूची में भी शामिल है। NATO देशों की सेनाओं पर जेहादी हमलों का नेतृत्व कर चुका है और हज़ारों आतंकवादियों को आत्मघाती बम बनाने का अनुभव भी इसके पास है।
बताया जाता है कि यह रहबरी शूरा का ये प्रमुख है। इसकी ख़ास पसंद बम धमाकों की योजना बनाना, सुन्नी इस्लाम की कट्टर मान्यताओं का प्रचार प्रसार करना और आतंकवाद के नाम पर दुनियाभर में जेहाद करना है।
आखिर यह चाहते क्या हैं पर गौर करें तो इनका मुख्य उद्देश्य अफगानिस्तान में शरिया क़ानून को फिर लागू करना और अफगानिस्तान के बाद कश्मीर, इराक, सीरिया और यमन जैसे देशों में जेहाद की नई लड़ाई शुरू करना है।
यह इस तरह के गहरे रहस्य है जिनके आधार पर मुल्ला हसन को तालिबान सरकार में प्रधानमंत्री बनाया गया है। मुल्ला हसन की सरकार में मुल्ला बरादर को उप प्रधानमंत्री बनाया गया है. मुल्ला बरादर का पूरा नाम मुल्ला अब्दुल गनी बरादर है। यह तालिबान के संस्थापकों में से एक है और तालिबान की आतंकवादी गतिविधियों को राजनीतिक रूप से सही ठहराता है। वह पाकिस्तान की जेल में आठ साल बन्द रह चुका है। ये तालिबान की पहली सरकार में उप विदेश मंत्री रह चुका है जो आत्मघाती हमले कराने में माहिर है।
ये दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादियों में से एक है। इसका उद्देश्य भी दुनिया में इस्लाम के राज को स्थापित करना है। पहले खबरें ये थीं कि मुल्ला हसन की जगह इसे प्रधानमंत्री बनाया जाएगा लेकिन दो वजहों से ऐसा नहीं हो पाया पहली वजह ये रही कि तालिबान में उसे लेकर ये धारणा बन गई है कि वो अमेरिका का करीबी है एवं दूसरी वजह इसके पीछे पाकिस्तान का होना बताया गया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान चाहता था कि तालिबान सरकार का नेतृत्व ऐसे नेता के पास हो जिसे किसी ने ना देखा हो और जो अंतरराष्ट्रीय दबाव में भी ना आए मुल्ला बरादर इन दोनों शर्तों पर ही खरा नहीं उतरता और शायद इसी वजह से उसे प्रमुख नहीं बनाया गया ।
मुल्ला बरादर के अलावा मुल्ला अब्दुल सलाम हनाफी भी अफगानिस्तान में उप प्रधानमंत्री होगा यानी सरकार में दो उप प्रधानमंत्री होंगे. मुल्ला अब्दुल सलाम हनाफी पिछले साल अमेरिका और तालिबान के बीच हुए दोहा शांति समझौते में शामिल था. उसने सोमवार सुबह ही अफगानिस्तान में चीन के राजदूत से मुलाकात की है. इससे आप तालिबान की इस सरकार में चीन के प्रभाव को भी समझ सकते हैं।
हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख सिराज़ुद्दीन हक्कानी को तालिबान सरकार में गृह मंत्री बनाया गया है। गृह मंत्री का काम देश में आतंरिक शांति को स्थापित करना होता है। वहीं सिराजुद्दीन हक्कानी पिछले लगभग 25 वर्षों से अफगानिस्तान में आंतरिक अशांति का सबसे बड़ा कारण रहा है. इसलिए हक्कानी को गृह मंत्री बनाना किसी हास्यास्पद से कम नहीं है।
सिराज़ुद्दीन हक्कानी अमेरिका की ओर से घोषित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी भी है उस पर अमेरिका ने 5 मिलियन डॉलर यानी 38 करोड़ रुपये का इनाम रखा है।
मुल्ला याकूब अफगानिस्तान का नया रक्षा मंत्री होगा। मुल्ला याकूब, मुल्ला उमर का बेटा है. जो तालिबान की पहली सरकार का प्रमुख था और मुख्य संस्थापक भी था जो अफगानिस्तान का एक बहुत बड़ा आतंकवादी है।
आमिर खान मुत्ताकी विदेश मंत्री होगा. मुत्ताकी को तालिबान के सबसे खतरनाक आतंकवादियों में गिना जाता है. सोचिए अब अफगानिस्तान के विदेश मामलों को एक आतंकवादी देखेगा। दुनिया टेबल पर बैठ कर इस आतंकवादी के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर करेगी।
खैरुल्लाह खैरख्वाह सूचना प्रसारण मंत्री होगा और ये आतंकवादी अमेरिका की जेल में 12 साल रह चुका है। अब ये अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा।
आतंकवादी अब्दुल हकीम न्याय मंत्री होगा. अब्दुल हकीम अब तक लाखों लोगों को कट्टरपंथी बना चुका है. इसे शरिया क़ानून का सबसे बड़ा समर्थक माना जाता है. सोचिए जब ऐसे आतंकवादी न्याय मंत्री होंगे तो अफगानिसस्तान में लोगों के साथ कैसे न्याय होगा।
मुल्ला हिदायत बदरी को वित्त मंत्री बनाया गया है, जो तालिबान की फंडिंग का हिसाब किताब रख चुका है। इसे हथियारों की ख़रीद फरोख्त के लिए जाना जाता है।
शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई उप विदेश मंत्री होगा. वो 1982 में देहरादून की सैन्य स्कूल में ट्रेनिंग ले चुका है और उसके पास मुजाहिदीन संगठनों के साथ तालिबान में भी काम करने का लम्बा अनुभव है जिसने पिछले दिनों दोहा में भारतीय दूतावास से स्टेनकजई ने मुलाकात की थी।
स्रोत- जी न्यूज
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