कृपा शंकर चौधरी गोरखपुर
प्रभात संगीत दिवस पर आनन्द मार्ग जागृति गोरखपुर में हुआ कार्यक्रम
गोरखपुर। आनंद मार्ग जागृति दक्षिणी बेतियाहाता गोरखपुर पर "प्रभात संगीत दिवस"मनाया गया जिसमें प्रभात संगीत गायन एवं नृत्य पर बच्चों को प्रोत्साहन हेतु कमेटी द्वारा शामभवी,पर्णिका,आराध्या,चैतन्य देव को आनन्द नित्या आचार्या ने प्रमाण पत्र के साथ पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम में प्रभात संगीत की प्रस्तुति समस्त मार्गी जनों द्वारा किया गया। आनन्द नित्या आचार्या द्वारा लिखित आनन्द मार्ग दर्शन सम्बन्धी सामान्य प्रश्नोत्तरी पाठ जयती जी द्वारा किया गया।
प्रभात संगीता जिसे एक नई सुबह के गीत या प्रभात के गीत के रूप में भी जाना जाता है। यह आनन्द मार्ग के संस्थापक प्रभात रंजन सरकार द्वारा रचित गीतों का संग्रह है । प्रभात रंजन सरकार ने १९८२ से १९९० में अपनी मृत्यु तक आठ वर्षों की अवधि में कुल ५,०१८ गीतों की रचना की, जिसमें गीत और माधुर्य शामिल हैं। इनमें जबकि अधिकांश गीत बंगाली भाषा में हैं, कुछ में हैं हिंदी , अंग्रेजी , संस्कृत , उर्दू , मगही ,मैथिली और अंगिका । प्रभात संगीता को कभी-कभी एक पोस्ट- टैगोर घराना (संगीत का स्कूल) भी माना जाता है । गीतों की कविता प्रेम , रहस्यवाद , भक्ति, नवमानवतावाद और क्रांति के तत्वों को व्यक्त करती है और गीत पूर्वी और पश्चिमी दोनों मधुर शैलियों का एक व्यापक स्पेक्ट्रम प्रस्तुत करते हैं।
कार्यक्रम में गोरखपुर DSLअवधूतिका आनंद नित्याचार्या, डॉ० रामनयन,डॉ० रंजना बागची,डॉ०धनीराम,डॉ०नित्येश देव, तपन ,उदयन,सुधीर, विवेक,संजय तिवारी,अशोक श्रीवास्तव,राहुल,रामू, मधु, मंजू,साधना,सीता, जयती,पूनम, बविता,सन्नो आदि लोगों की उपस्थिति रही।
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