विश्वपति वर्मा,
एक बार एक सियार धोबी के नील की नाँद में गिर गया ।जैसे तैसे वह बाहर निकला उसके बाद जंगल के अन्य जानवर उसको सलाम ठोंकने लगे यंहा तक कि शेर के कदम भी पीछे हो गए अब सियार अपने आपको शेर से भी ज्यादा शक्तिशाली समझने लगा ।धीरे- धीरे दिन बीतने लगे चर्चाओं का बाजार भी गर्म होने लगा ,अब जंगल के चारो तरफ यह बात फैल चुकी थी कि जंगल का नया राजा आया है जो नीले रंग का है।हालांकि अभी किसी जानवर को इस बात की जानकारी नही थी कि जंगल का नया राजा नील में गिरने की वजह से नीला हो गया है जो एक सियार है।बात ज्यादे दिन तक पच नही पाई एक दिन सियार की पोल खुल गई सियार मारा गया ,बेइज्जत हुआ ,अन्य राज्यों में सियार और उसकी बिरादरी को काफी आलोचनाएं झेलनी पड़ी और सियार को राजा से प्रजा होना पड़ा।
ठीक इसी प्रकार से देश मे बनाये गए मॉडल एवं सार्वजनिक शौचालय की स्थिति है ,ओडीएफ के नाम पर घरों में बनाये गए शौचालय की स्थिति भी इससे अलग नही है।जो बाहर से तो रंग -पेंट कर दिया गया लेकिन शौचालय के सीट से लैट्रिन के गड्ढे तक ढंग से पाइप भी नही लगाया गया है
बस्ती जनपद के सैकड़ो परिषदीय विद्यालयों में 14 वें वित्त से लाखों रुपया खर्च कर शौचालय का निर्माण कराया गया ऐसे ही जिले के कई सार्वजनकि स्थानों पर सांसद निधि से शौचालय का निर्माण हुआ है ।
हाल ही में हमने कई शौचालयों को निकट से देखा जो काफी घटिया क्वालिटी की बनाई गई है ,कई शौचालय के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार हुआ है जंहा पर पुराने बने हुए शौचालय को बाहर से पेंट-पुट्टी लगाकर चमक- दमक बना दिया गया लेकिन शौचालय की सच्चाई यह है कि उसका भविष्य ज्यादे दिन तक नही है ।
ओडीएफ के नाम पर गांव में बनाये जा रहे शौचालयों को भी गुणवत्ताविहीन बनाया गया है ।रुधौली से हमारे सहयोगी राज आर्या ने एक फोटो भेजी है ।जंहा पर शौचालय बनने के 10 दिन बाद गड्ढे का छत भरभरा का गिर गया।
अब इस पूरे मामले में सियार से भी ज्यादा किरकिरी शासन-प्रशासन की हो रही है ।गली ,गांव ,सड़क ,शहर से लेकर हर जगह ये शौचालय के नाम पर बेइज्जत हो रहे हैं ।घटिया निर्माण की वजह से वें लोग शौचालय का उपयोग भी नही कर पा रहे हैं जिनके घर पर शौचालय बना हुआ है।अब इसमें सरकार के ऊपर भी सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या वह चाहती है कि गांव शौच से मुक्त हो ?अगर उसका मिशन गांव को शौच से मुक्त करना है तो उसकी ही मशीनरी द्वारा शौचालय निर्माण पर जमकर भ्रष्टाचार क्यों हो रहा है ?क्या डिजिटल इंडिया के समय मे भी उसके पास कोई ठोस उपाय नही है जिससे स्वतंत्र एजेंसी द्वारा शौचालय की गुणवक्ता को मापा जाए।
या फिर नील में गिरे हुए सियार की तरहं सरकार भी जनता को झूठे सपने दिखा कर जंगल के राजा की तरहं जनता में राजा बने रहना चाहती है।

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