ब्यूरो कानपुर - रवि गुप्ता
कौम के बानी मिल्लत के रहनुमा हिन्द के ताजदार सर सैयद अहमद खान की 201 वीं जयंती के अवसर पर भारत में इनकी जयंती राष्ट्र की एकता एवं अखंडता देश की भलाई आदि का संकल्प लेते हुए मनाई गई इसी कड़ी में परेड शिक्षक पार्क में मुस्लिम डेमोक्रेटिक फ्रंट के तत्वाधान में संगठनों व राजनीतिक संगठनों ने मिलकर सर सैयद अहमद खान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजली देते हुए पुष्प अर्पित किए और उनके द्वारा बताए गए रास्तों के अनुसरण करते हुए शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने के लिए सभा मे वक्ताओं ने अपने अपने विचार व्यक्त किये।
आधुनिक शिक्षा को लेकर जगाई थी अलख
सर सैयद अहमद खान का इतिहास काफी चुनौती भरा रहा है वे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक रहे है जिस समय मुस्लिम यूनिवर्सिटी की बुनियाद रखने के लिए सर सैयद ने कौम के सामने हाथ फैलाया तो लोगो ने मुंह फेर लिया लेकिन वह अपने दृढ़ निश्चय के साथ डटे रहे और मुस्लिम यूनिवर्सिटी की बुनियाद डाली आज वही यूनिवर्सिटी विश्व स्तरीय पर पहचानी जाती है वहाँ का छात्र अपनी भाषा के लिए जाना जाता है क्योंकि अलीगढ़ में तहज़ीब को भी बढ़ावा दिया गया है। आपको बता दें कि सर सैयद अहमद खान का जन्म 17 अक्टूबर 1817 को सैयद परिवार में हुआ था उन्होंने विशेष रुप से आधुनिक शिक्षा की आवश्यकता को महसूस किया सर सैयद अहमद खान ने लोगो को शिक्षा को लेकर प्रेरित किया उन्होंने कभी भी हिन्दू मुसलमान के आपसी मुद्दों को लेकर कभी भी उन्होंने राजनीति नही की जिसका परिणाम है कि आज हिन्दू और मुस्लिम उनका सम्मान करते हैं।
सबको शिक्षा का बराबर का अधिकार
शाकिर अली उस्मानी ने बताया कि सर सैयद अहमद खान अपने देश की शिक्षा के प्रति इतने जागरूक थे कि उन्होंने अलीगढ़ विश्वविद्यालय की स्थापना करने के साथ ही कई अन्य महा विद्यालयों की स्थापना की और देश की युवा पीढ़ी को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आवाहन किया बताया जाता है कि देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था यहां पर ब्रिटिश हुकूमत थी और वह अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते थे इसकी जानकारी आम लोगो को नही थी जिससे सभी को काफी दिक्कतें उठानी पड़ती थी सर सैयद ने विश्वविद्यालय व महाविद्यालय की स्थापना मात्र इसी उद्देश्य को लेकर की थी कि हर वह भारतीय चाहे वह हिन्दू हो या मुसलमान हो उसे शिक्षा का ज्ञान अवश्य होना चाहिए ताकि वह देश के ऊपर हुकूमत करने वाले अंग्रेजो का मुंहतोड़ जवाब दे सके और उनको उन्ही की भाषा मे जवाब दे सकें। उन्होंने बताया कि आज उन्ही की जागरूकता व बताए गए रास्तों पर चलकर ही हम सब शिक्षित है और हर दिशा में अपने कार्य बेहतर ढंग से कर रहे हैं।
इस अवसर पर मो इरफान ने बताया कि हम सभी उनके बताए हुए रास्तों पर चल रहे है और गरीब बच्चो को जो शिक्षा से दूर रहते है उन्हें शिक्षा का एहसास कराए उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करें।
आधुनिक शिक्षा को लेकर जगाई थी अलख
सर सैयद अहमद खान का इतिहास काफी चुनौती भरा रहा है वे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक रहे है जिस समय मुस्लिम यूनिवर्सिटी की बुनियाद रखने के लिए सर सैयद ने कौम के सामने हाथ फैलाया तो लोगो ने मुंह फेर लिया लेकिन वह अपने दृढ़ निश्चय के साथ डटे रहे और मुस्लिम यूनिवर्सिटी की बुनियाद डाली आज वही यूनिवर्सिटी विश्व स्तरीय पर पहचानी जाती है वहाँ का छात्र अपनी भाषा के लिए जाना जाता है क्योंकि अलीगढ़ में तहज़ीब को भी बढ़ावा दिया गया है। आपको बता दें कि सर सैयद अहमद खान का जन्म 17 अक्टूबर 1817 को सैयद परिवार में हुआ था उन्होंने विशेष रुप से आधुनिक शिक्षा की आवश्यकता को महसूस किया सर सैयद अहमद खान ने लोगो को शिक्षा को लेकर प्रेरित किया उन्होंने कभी भी हिन्दू मुसलमान के आपसी मुद्दों को लेकर कभी भी उन्होंने राजनीति नही की जिसका परिणाम है कि आज हिन्दू और मुस्लिम उनका सम्मान करते हैं।
सबको शिक्षा का बराबर का अधिकार
शाकिर अली उस्मानी ने बताया कि सर सैयद अहमद खान अपने देश की शिक्षा के प्रति इतने जागरूक थे कि उन्होंने अलीगढ़ विश्वविद्यालय की स्थापना करने के साथ ही कई अन्य महा विद्यालयों की स्थापना की और देश की युवा पीढ़ी को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आवाहन किया बताया जाता है कि देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था यहां पर ब्रिटिश हुकूमत थी और वह अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते थे इसकी जानकारी आम लोगो को नही थी जिससे सभी को काफी दिक्कतें उठानी पड़ती थी सर सैयद ने विश्वविद्यालय व महाविद्यालय की स्थापना मात्र इसी उद्देश्य को लेकर की थी कि हर वह भारतीय चाहे वह हिन्दू हो या मुसलमान हो उसे शिक्षा का ज्ञान अवश्य होना चाहिए ताकि वह देश के ऊपर हुकूमत करने वाले अंग्रेजो का मुंहतोड़ जवाब दे सके और उनको उन्ही की भाषा मे जवाब दे सकें। उन्होंने बताया कि आज उन्ही की जागरूकता व बताए गए रास्तों पर चलकर ही हम सब शिक्षित है और हर दिशा में अपने कार्य बेहतर ढंग से कर रहे हैं।
इस अवसर पर मो इरफान ने बताया कि हम सभी उनके बताए हुए रास्तों पर चल रहे है और गरीब बच्चो को जो शिक्षा से दूर रहते है उन्हें शिक्षा का एहसास कराए उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करें।

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