लखनऊ - महेंद्र मिश्रा ब्यूरो उत्तर प्रेदश
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि शब्दकोष से नए-नए शब्दों की खोज में भाजपा नेताओं
का कोई जवाब नहीं। अभी तक सदियों से लोग कुंभ और अर्धकुंभ से परिचित
थे। भाजपा सरकारों ने इस वर्ष इलाहाबाद में पड़ने वाले अर्धकुंभ को कुंभ
प्रचारित कर दिया। किसान अभी तक गोष्ठियों, सेमिनारों और सम्मेलनों में
भागीदारी करते थे। भाजपा सरकार ने इस वर्ष कृषि कुंभ ईजाद कर दिया। अभी
पता नहीं भाजपा और कितने कुंभ बनाएगी।
भाजपा को सारे
संसाधन चूंकि पूंजीघरानों से ही मिलते हैं इसलिए उनके हितों का
पोषण-संरक्षण उसकी प्राथमिकता में रहता है। किसान अपनी कर्जमाफी के लिए आज
भी आंदोलित है, बैंक उनसे वसूली करने लगे हैं, फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य
भी किसान को नहीं मिल रहा है। इस सबसे परेशान 50 हजार से ज्यादा किसान
भाजपा राज में आत्महत्या कर चुके हैं। आलू किसानों को घोषित समर्थन मूल्य
का अता पता नहीं। गन्ना किसानों का दस हजार करोड़ रूपया अभी भी बकाया है
जबकि चीनी मिलों का पेराई सत्र प्रारम्भ होने वाला है।
सच तो यह है कि कृषि कुंभ तो एक बहाना है। भाजपा की किसान विरोधी नीति
से ध्यान भटकाना है। इस कुंभ में जो किसान आए वह अपनी बात कहने के लिए
तरसते रह गए। उनकी बातें न सुनी जानी थी न ही सुनी गई। किसानों का वोट
हथियाने के लिए संकल्प पत्र में जो वादे किए गए थे उनके बारे में भी तो इस
कुंभ में बताना चाहिए था लेकिन भाजपा सरकार ने जब कुछ किया धरा ही नही तो
वह किसानों को बताती क्या?
प्रधानमंत्री ने सोलर पैनल
की बात ऐसे की जैसे वह उसकी कोई अपनी योजना हो जबकि हकीकत यह है कि वह
समाजवादी सरकार की योजनाओं का ही भाजपाई झूठा श्रेय ले रहे है। समाजवादी
सरकार में सोलर प्लांट लगा था और लोहिया आवास में सोलर लाईट लगाई जा रही
थी। सबसे पहले समाजवादी सरकार में ही मुफ्त सोलर पैनल और पम्प दिए गए थे।
भाजपा अब तक नहीं बता पाई है कि उसने कितने किसानों का कर्ज माफ
किया। डीजल-पेट्रोल, खाद-बीज की मंहगाई क्यों नहीं रूक रही और गन्ना
डिलीवरी के 14 दिनों के अंदर भुगतान के वादे का क्या हुआ? मुख्यमंत्री
तो कह रहे हैं कि गन्ना की खेती ही बंद हो क्योंकि उससे डायबिटीज रोग होता
है। वैसे भी मुख्यमंत्री के फार्मूले अजीबोगरीब होते हैं जैसे बंदर
उत्पात करें तो हनुमान चालीसा पढ़ा जाए। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करते हैं लेकिन यह नहीं बताते कि
किसानों की आत्महत्या के आंकड़े क्यों बंद कर दिए हैं।
जब
समाजवादी पार्टी की सरकार थी उत्तर प्रदेश में पहली बार मुफ्त सिंचाई योजना
लागू की थी जिसके तहत 12 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई का लक्ष्य प्राप्त
किया गया। किसानों को समय से खाद-बीज उपलब्ध कराया गया था। उत्तर प्रदेश के
बजट की 75 प्रतिशत राशि गांव-खेती के लिए रखी गई थी। समाजवादी सरकार में
50 हजार तक के लोन माफ करते हुए 7,86,1,67 किसानों को सीधा फायदा पहुंचा
था।
भाजपा सरकार की उल्टी सीधी हरकतों के कारण ही उत्तर
प्रदेश शीर्ष आसन में ट्रोल कर गया है। राज्य की भाजपा सरकार ने 20 माह से
कम समय में उत्तर प्रदेश को विकास में 20 वर्ष पीछे ढकेल दिया है। उत्तर
प्रदेश को बर्बादी के कगार पर पहुंचाने का श्रेय भाजपा को ही जाएगा।

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