चीफ रिपोटर up - चन्द्र मोहन तिवारी
स्वास्थ्य विभाग में
मिलावटी खून का रैकेट लोगों की जान की आफत बन चुका है और जिस प्रकार आम
जनता की जान जोखिम में डालकर यह घिनौना खेल हो रहा है वह बेहद चिन्ताजनक
है। प्रदेश सरकार को तत्काल इस पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम
उठाने की जरूरत है।
उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी की प्रवक्ता रफत फातिमा ने आज जारी बयान में कहा कि प्रदेश
में लगातार हो रही खून की इस धांधली पर अब तक किसी की निगाह क्यों नहीं
गयी, यह सरकार और स्वास्थ्य विभाग के सामने बड़ा सवाल है।
प्रवक्ता
ने कहा कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह 56 इंच के
लैपटाप और 56 इंच की एलईडी से ही सारा काम चला रहे हैं और सारी स्वास्थ्य
सेवाओं को बदहाली की कगार पर ढकेल रहे हैं। एक तरफ पूरे प्रदेश में
एम्बुलेंस की भारी कमी और स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण लोगों को
लाशें कन्धों पर ढोनी पड़ रही हैं तो दूसरी ओर मिलावटी खून के चलते निर्दोष
लोगो को अपनी जांन गंवानी पड़ रही है।
इतना ही नहीं अभी कुछ समय पूर्व जिस
प्रकार स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आयी है उससे आम जनता का भरोसा
चिकित्सा व्यवस्था से पूरी तरह टूट गया है। जिस प्रकार खुलेआम एक झोलाछाप
डाक्टर द्वारा उन्नाव में एचआईवी संक्रमित इंजेक्शन के जरिये सैंकड़ों
निर्दोष लेागों को एचआईवी से संक्रमित कर दिया जिसके चलते लोगों को अपनी
जान गंवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है इसके बाद भी शासन-प्रशासन की नींद
नहीं टूटी और अब मिलावटी खून का काला कारोबार आम जनता की जान की आफत बनकर
टूट रहा है।
प्रवक्ता
ने कहा कि खून के काले कारोबार का खुलासा होने के बाद भी अभी तक स्वास्थ्य
महकमे की नींद नहीं खुली है और अभी तक कोई भी बड़े अधिकारी का नाम सामने
नहीं आया है जबकि बिना उनके संरक्षण के इतना बड़ा रैकेट चल ही नहीं सकता।
जानकारी के अनुसार कई लोगों के तार इससे जुड़े हुए हैं एफएसडीए की भूमिका पर
भी सवाल उठता है। आखिर पिछले एक साल से कोई जांच अभियान क्यों नहीं चलाया
गया। इन सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी
से कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए।

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