विश्वपति वर्मा(सौरभ)
भारत का लगातार आर्थिक पतन होता जा रहा है देखा जाए तो सत्ता के इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों ने अपने लोगों को लाभ पहुंचाने का ही काम किया है ।
सत्ताधारियों ने भ्रष्टाचार करके अपार संपत्ति कट्ठा कर ली है ।जो देश ही नही विदेश में जमा करके रखे हुए हैं विदेश में जमा राष्ट्रीय संपत्ति हमारी आर्थिक पतन के लिए जिम्मेदार हैं ।
अभी तक राष्ट्रीय धन को व्यक्तिगत स्वार्थों में ज्यादा ही खर्च किया गया है,सत्ताधारियों ,नेताओं और उनके बेटे बेटियों ने अपने ऐशो इशरत पर जी भर कर धन की लुटाया है जो भारत के खजाने पर ही सेंध लगाया गया है। वंही महंगाई भी लगातार बढ़ती जा रही है इस महंगाई से उत्पादक शक्तियों का भी हास्र हुआ है सारी उत्पादक और निर्माण इकाइयां अभाव से ग्रस्त हो गई हैं।
आर्थिक अभाव के कारण किसान और श्रमिक जो दोनो उत्पादन और निर्माण की धुरी होते हैं दोनों ही तन और मन से दुर्बल हो गए हैं ,भोजन वस्त्र और आवास की कमी ने उनको तन और मन से कमजोर कर दिया है तथा पढ़ाई और दवाई के अभाव में उनका मन दुर्बल हो गया है ।
आर्थिक दुर्व्यव्यवस्था से उत्पादक उर्जा में लगातार कमी आई है और देश का आर्थिक पतन हो रहा है ।भारत आर्थिक रूप से जर्जर हो चुका है रुपये का घटता मूल्य इसका स्पष्ट प्रमाण है।

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