ब्यूरो कानपुर- रवि गुप्ता
हाईकोर्ट के आदेश के बाद एल्गिन मिल के हज़ारो मजदूरों के साथ जिस तरह से
प्रशासन द्वारा क्वार्टर खाली कराया जा रहै हैं। न ही उन्हें कोई पैसों का
भुगतान किया गया हाईकोर्ट से भी सच्चाई छिपाई गई जबकि हाईकोर्ट ने उन
मजदूरों को भुगतान करने के लिए कहा था
लेकिन भुगतान तो दूर की बात जबरन
उनके घर खाली कर उनका सामान फेंकते हुए बच्चों को बेघर करने का काम किया जा
रहा है जो कि पूरी तरह गलत है जिसको लेकर महानगर कांग्रेस कमेटी व इंटक ने
संयुक्त प्रेस वार्ता की। प्रशासन को आगाह किया गया कि पहले उनका भुगतान
और उनके रहने की व्यवस्था की जाए तब क्वार्टर खाली कराया जाए।
इन मजदूरों से इन मंत्रियों व सांसद ने कभी भी मिलना उचित न समझा
शहर अध्यक्ष हर प्रकाश अग्निहोत्री ने कहा कि जिस तरह से एल्गिन मिल के लोगो की कालोनियां खाली कराई जा रही है हाईकोर्ट के आदेश का हम सम्मान करते है लेकिन प्रशाशन जिस तरह से मजदूरों के साथ मनमानी कर रहा है वह गलत है मजदूरों को भुगतान की व्यवस्था कराई जाए।इंटक नेता आशीष पांडे ने बताया कि 1984 में 40 लाख लोन लिया गया था बीआईसी के अधिकारियों ने जानबूझकर इस 40 लाख रुपये का 38 साल के बाद भी भुगतान नही किया अरबों रुपय की प्रॉपर्टी बेची गयी लेकिन भुगतान नही हुआ हाईकोर्ट का आदेश है कालोनी खाली करा दी जाए हमे मंजूर है लेकिन कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए उस जगह एसएसपी का बंगला भी है उसमें शामिल है बीआईसी का मुख्यालय उनका बंगला भी खाली हो। बीआईसी मुख्यालय में जो लोग लाल इमली बैठे हुए एसी में मजे ले रहे है वह भी खाली होना चाहिए हमारी जिलाधिकारी से मिलकर यह बात करेंगे कि क्वार्टर तो खाली कर देंगे लेकिन उनके लिए भुगतान और रहने की व्यवस्था की जाए। लिक्विडेटर तो खाली करा रहे है लिक्विडेटर इसके लिए लिख कर दें की भुगतान करेंगे ।कहा कि सांसद, और दो केबिनेट मंत्री कानपुर से ही है लेकिन मदद तो दूर ऊनसे मिलने की जरूरत नही समझी आज इन मजदूरों का परिवार सड़क पर तड़प रहा है
मजदूरों की बेटियां तड़प रही है बेटी
बचाओ बेटी पढ़ाओ की बात करते है इन बेटियो को कौन आगे बचाएगा और पढ़ायेगा यह
हिंदुस्तान की बेटियाँ है न कि पाकिस्तान की हमारी मांग है कि प्रशासन
इसमें सकारात्मक रवैया अपनाए और कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन न होने दे
लिक्विडेटर लिख कर दें मजदूरों को बकाया भुगतान कब तक देंगे यदि उसके बाद
भी मांग न मानी गयी तो आगे सड़को पर उतरकर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस
अवसर पर रतन अग्रवाल भी मौजूद रहे।

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