रिपोर्ट - पुनीत मिश्रा
आज भी बेटे और बेटी में फर्क कर पुत्र को ही उचा स्थान दिया जाता है ।लेकिन अब हम आपकों जो खबर दिखाने जा रहे है ।उसके बाद शायद हर माँ बाप यही कहेगे कि अगले जन्म मोहे बिटिया ही दीजो ।बेटी ने परमपराओ को तोड़ते हुए अपने पिता का अंतिम संस्कार संपन्न कराया । अंतिम संस्कार में न सिर्फ परम्पराए टूटी बल्कि ये बेटे और बेटियों में फर्क करने वाले लोगो को इसके बेमाने होने की सीख भी दे गया ।
फर्रुखाबाद के स्वर्ग धाम में रोजाना मोक्ष के लिए कई अंतिम संस्कार होते है । पांचालघाट के स्वर्ग धाम में एक बेटी ने अपने पिता का अंतिम संस्कार संपन्न कराया । मामला थाना मऊदरवाजा क्षेत्र के गांव धारानगरी निवासी सुभाष जाटव की बीमारी के चलते मौत हो गई ।मृतक की पत्नी प्रेमलता इस बात से परेशान थी पति की चिता को मुखाग्नि कौन देगा क्योकि उनके तीन बेटी है कोई बेटा नही है।
अपनी बड़ी बेटी पूजा का विवाह दिल्ली में रहने वाले अरविंद के साथ किया था। जो वर्तमान में मुंबई में नौकरी कर रहा है।जब पिता की मौत की खबर बड़ी बेटी हो हुई तो अपने मायके पहुंची और उसने कहा कि मेरे कोई भाई नही है तो क्या हुआ मै बेटे का फर्ज निभाऊंगी।उसने वही किया पांचाल घाट गंगा तट पर गांव वालों की मदद से अपनी पिता की चिता तैयार कराकर अपने हाथों से उनको मुखाग्नि दी।बेटी ने रोते हुए बताया कि मेरी दो छोटी बहने जूली उर्फ जाग्रति व नेहा है उनकी पढ़ाई लिखाई से पूरे परिवार की बड़ी बेटी की तरह नही बड़े बेटे की तरह जिम्मेदारियों का निर्वाह करूंगी।जिस समय वह अपने पिता को मुखाग्नि दे रही थी उस समय उसके हौसले को देखने के लिए चारो तरफ भीड़ ही भीड़ दिखाई दे रही थी।
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